दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । सब संभव है
अपने सिर पर, जहाँ पर अनंत शक्तियों से परिपूर्ण महान मस्तिष्क छुपा हुआ है, उस पर दोनों हाथों को फेरिये और कहिये सब कुछ संभव है।
विज्ञान और विचारों के उन्नतिकरण के द्वारा सब कुछ संभव है। विज्ञान हमें इस बात का बोध कराता है कि मनुष्य अपनी बुद्धि के बल का प्रयोग करके चाँद और मंगल ग्रह, जो हमसे अरबों मील दूर हैं, वहाँ पर भी पहुँच सकता है।
वहीं दूसरी ओर मनुष्य विचारों का उन्नतीकरण करके दुनियाभर के महानतम विचारों में छुपी रहस्यमयी शक्तियों का अनुभव कर सकता है। आज हम सभ्यता के सबसे विकसित दौर से गुजर रहे हैं। हम उस महान दौर में जी रहे हैं, जहाँ मनुष्यों के लिए असंभव जैसी कोई बात बची नहीं है।
यदि किसी बात से आपका मन छलनी-छलनी हो चुका है और सहारा नहीं है तो भी यह घबराने या चिंता करने का विषय नहीं है।
गिर कर फिर उठ खड़ा होने के सामर्थ्य का नाम ही मनुष्य है। हम मनुष्यों ने जो कुछ भी महानतम उपलब्धि हासिल की है वह सब हार नहीं मानने के दृढ़ स्वभाव के कारण ही संभव हो सका है। आखिर मनुष्य हर बात को संभव कैसे बनाता है ! यह सचमुच रहस्यमय बात है। वास्तव में, मनुष्य की मस्तिष्क में ही उनके विकास का उपाय बताने वाले सभी गहनतम रहस्य छुपे हुए हैं।
अपने सिर पर, जहाँ पर अनंत शक्तियों से परिपूर्ण महान मस्तिष्क छुपा हुआ है, उस पर दोनों हाथों को फेरिये और कहिये सब कुछ संभव है। असम्भव को संभव कौन बनाता है! शरीर के किस हिस्से में महान शक्तियों का भंडार है! वास्तव में, कपाल के भीतर जो मन है, उसी में ही यह सब शक्तियाँ समाहित है। मन का विकास ही वास्तविक विकास है और मन का पतन ही महापतन है।
मन का विकास करना और उसका पतन करना यह हमारे ही हिस्से में है। हमारा उत्तरदायित्व तो केवल विकास का है, पतन का बिल्कुल ही नहीं। मनुष्य में निर्माण करने की अद्वितीय क्षमता है। मन की तीन महान शक्तियाँ हैं- जानने की, मानने की और करने की। इन तीन शक्तियों के द्वारा ही सब कुछ संभव किया जा सकता है।
मन की शक्तियों को कैसे जगाया जाय, वास्तव में यह प्रश्न बहुत ही गूढ़ और महत्वपूर्ण है। जिस तरह गहरे कुएँ से पानी निकालने के लिए रस्सी युक्त बाल्टी चाहिए होती है, उसी ही प्रकार से विषयों के गहन अध्ययन द्वारा ही मन की गहराइयों पर उतरा जाता है। मन की गहराइयों में, तली में सभी प्रश्नों का जवाब पहले से ही विद्यमान रहता है। जवाब उसी को मिलता है, जो अपने भीतर में गहरी जिज्ञासा को जगाते हैं।
लोगों में एक खराब प्रवृत्ति होती है कि वे किसी पुरानी बात को पकड़कर बैठे रहते हैं। विचार परिवर्तन द्वारा ही आचरण में परिवर्तन आता है। पुराने विचार की जगह नए विचारों को स्थान देना चाहिए। कोई भी व्यक्ति सड़े हुए टमाटर की चटनी नहीं खाना चाहेगा। हमारे दकियानूसी विचार हमारे जीवन के स्वाद को बिगाड़ देते हैं। आज ही कॉपी उठाइये और अपने विचारों को लिखिए और देखिये कि उन विचारों की जगह कौन से नई और ज्यादा रचनात्मक विचार को रोपित करना चाहेंगे।
विचार बीज की तरह होते हैं। वे एक दिन पेड़ बनकर अनेक फल देंगे। आपको अच्छे विचार के बीज ही अपने मन में बोने हैं।
आपका जन्म महान कार्यों को अंजाम देने के लिए हुआ है, न कि सड़ी गली विचारधाराओं को ढोने के लिए। अपने महान मन में मैला मत ढोइये। आगे बढ़ने की संभावनाएँ हर जगह हैं। आप कदम तो बढ़ाइये, दुनिया आपका साथ देने के लिए अगले चौराहे पर प्रतीक्षा कर रही है।
(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)
(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)



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