दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । हमें चाहिए चार मित्र
जीवन में मित्रों की बड़ी उपयोगिता है। मित्र, सहयोगी, हितैषी आसानी से मिलते नहीं। इन्हें अर्जित करना पड़ता है, इनका सृजन करना पड़ता है। पास एक अच्छी मित्र मंडली है तो यह हमारे लिए बड़ी उपलब्धि की बात है।
जीवन चार पहियों पर चलने वाले वाहन की तरह है। सभी पहियों का बराबर सहयोग मिलते रहने से जीवन की गाड़ी अच्छे ढंग से चलती रहती है। जीवन की गाड़ी को चलाने के लिए विशिष्ट जनों का साथ हमें मिलता रहे, इसके लिए आवश्यक है कि हममें नए लोगों को आकर्षित करके उन्हें अपना हितैषी बनाने की योग्यता होनी चाहिए।
हमारे जितने ज्यादा सहयोगी और हितैषी होंगे, उतने ही अधिक हम आगे बढ़ते जाएँगे। वास्तव में हमारा काम बनता है औरों के सहयोग करने से।
हमारा जीवन बहुत विस्तृत है, फैलाव लिए हुए है। हमें पग-पग में सहयोग की जरूरत होती है। यदि सहयोग में सौहार्द्र की भावना हो तो उसका प्रभाव निःसंदेह ही कई गुना बढ़ जाएगा।
वास्तव में हमारे जीवन के भार को उठाने के लिए मजबूत कंधों वाले चार मित्र चाहिए। कहा भी गया है कि मित्रों के बिना जीवन अधूरा है। वास्तव में देखा जाय तो मित्र ही हमारे जीवन के भार को थामे रहते हैं। वे सहयोग देते हैं, मार्गदर्शन देते हैं, सांत्वना देते हैं और जरूरत पड़ने पर हमारे समक्ष खड़े रहते हैं।
सबसे अच्छी योग्यता है मित्र बनाने की योग्यता। आपकी मित्र मंडली में ये चार मित्र होने ही चाहिए- आलोचक मित्र, ज्ञानी मित्र, धनी मित्र और सहृदयी मित्र।
1. आलोचक मित्र – हमारी आलोचना करे
2. ज्ञानी मित्र – हमें सलाह दे
3. धनी मित्र – हमारी सहायता करे
4. सहृदयी मित्र – हमारी भावनाओं को समझे
आलोचक एवं समीक्षक मित्र वह है जो हमारे कार्यों की घोर आलोचना करे, हमारे कार्यकलापों के प्रति सावधान करे और हमारे कार्यों में उपस्थित खामियों को खोज-खोज कर बताए। जो मित्र हमारी आलोचना करते हैं, उन्हें सर्वोच्च मित्र मानना चाहिए। कोई हमें हमारी बुराइयों के प्रति सचेत करे तो यह हमारे लिए महान उपकार ही की बात है। हमें आलोचना सहने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
मनुष्य बुद्धि से संचालित प्राणी है। आप कोई भी कार्य ले लीजिए, उसे जानने, समझने और होने के लिए विशेष समझ और जानकारी की आवश्यकता पड़ती ही है। यह भी सही है कि हम प्रत्येक मामलों के जानकार नहीं हो सकते। हमारे कुछ ऐसे होने चाहिए जो हमें उचित और उच्च कोटि के सलाह दें। जानकारी और ज्ञान से हमारा काम सरल हो जाता है। आज के समय में ज्ञानी मित्र बहुत दुर्लभ हैं। यदि ऐसे मित्र मिल जाय तो उसे हमेशा अपने से जोड़कर रखना चाहिए।
जीवन में कभी न कभी विपदा आने पर या अच्छे कार्यों को करने के लिए रुपये-पैसे की जरूरत तो पड़ती ही है। कई बार ऐसे अवसर आते हैं, जिन्हें संपन्न करने के लिए तत्काल हमारे पास रुपये-पैसे नहीं होते। हमारे पास एक ऐसा मित्र होना चाहिए जो हमें चार पैसे की मदद कर सके। संकट या सुख को संपन्न कराने के लिए मित्र को सहयोग करना ही चाहिए और समय आने सहयोग की याचना भी करनी चाहिए।
सहृदयता हम सबके लिए आवश्यक है। सहृदयता के माध्यम से हम अन्य लोगों की भावनाओं की अनुभूति करते हैं। भावनाओं को समान रूप से अनुभूत करने की शक्ति ही सहृदयता है। हमारी मित्र मंडली में सहृदयी मित्र होने चाहिए जो हमें भावनात्मक संबल प्रदान करें। हमारे साथ कुछ पल बैठे तथा भावनात्मक रूप से समृद्ध करे। अगर हम रुग्ण हैं तो हमारा संबल बढ़ाए। निराशा के समय आशाएँ जगाने वाली बातें करे। हमारे साथ हंसे, खिलखिलाए और हमारी भावनाओं का आदर करे। मित्र की भावना को समझ कर उसके साथ बने रहना एक भला संस्कार है।
लोग हमें अपना मित्र क्यों मानने लगेंगे। लोग हमें अपना मित्र तभी मानेंगे जब हममें कुछ न कुछ विशेषता होगी। लोग हमें अपना तभी समझेंगे, जब हम प्रेम किये जाने योग्य बनेंगे। लोग हमें अपने स्नेह के योग्य तभी समझेंगे जब हम उनके विचारों, सहयोग, सद्भाव आदि का आदर करेंगे।
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रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।
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