दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । किताबें हमें बचा लेंगी
किताब क्या हैं? कागजों पर मुद्रित चंद शब्द। या उससे भी आगे कुछ और। किताबें क्या हैं? विचारों के महासागर या भावनाओं का महा आकाश। किताबें हमारे मन में जगह-जगह छेद कर देती हैं, ताकि अधिक रोशनियाँ हमारे अंतस में समा जाएँ।
किताबें आखिर करती क्या हैं? आखिर किताबें जन्म क्यों लेती हैं? जब हम गिरते रहेंगे तो किताबें हमें बचा लेंगी। रोते रहेंगे जब हम तो किताबें हमें हँसा देंगी। हम दुःखी रहेंगे तो किताबें हमें हमारा सुख लौटा देंगी।
किताबें क्या चाहती हैं? किताबें आजादी चाहती हैं। किताबों को अलमारियों से मुक्त कीजिए, उन किताबों को जिसे कैदखाने में डाल रखे हैं। हमारी पसंदीदा किताबें कैदखाने में सलाखों के पीछे से हमारी ओर ताकती हैं, झांकती हैं। किताबें हमारे द्वारा पढ़ लिए जाने का इंतजार करती रहती हैं। किताबें कुछ बताना चाहती हैं। किताबें कुछ समझाना चाहती हैं। थमा दीजिए अपने हाथों को कोई महान किताब।
यह दुनिया है किताबों की। यह दुनिया किताबों की है। दुनिया में हर रोज ही 6000 किताबें प्रकाशित होती हैं। इस दुनिया को किताबों की दुनिया बनाइए। अपने दुनिया को किताबों से सजाइए। किताबों को अपनी दुनिया में शामिल कीजिए। किताबें ही हमें बचाएँगी। किताबें ही हमें संवारेंगी। किताबें ही हमें संभालेंगी।
किताबें ही असमर्थों के साथी हैं। किताबें ही असहायों के सहायक हैं। किताबें ही गरीबों का संबल है। किताबें ही निर्बलों का बल हैं। किताबों के पास जाइए। किताबों को अपने पास आने दीजिए। किताबें तरसती हैं हमारे हाथों में आने के लिए। क्या हम भी कभी तरसेंगे किताबों के लिए? वह सचमुच अभागा है जिसने साल भर में 10-20 किताबें न पढ़ लिए हो।
अपने मन को समझाइए कि कुछ किताबें पढ़ लिया करे। अपने मन को समझाइए कि किताबों को पढ़ते समय कुछ विशेष एकाग्रता भी रखे। यह कैसा हमारा दुर्भाग्य है कि हमारे पास किताबें तो हैं पर हमारे पास किताबों के लिए एक अनुशासित मन नहीं है। हम कैसे अभागे हैं कि हमारा मन किताबों को देखकर आकर्षित नहीं होता। किताबें हमारे मन को रगड़कर धो देती हैं, सफाई करती हैं। अपने मन को चमकाना है तो किताबों को अपनाना है।
हमारे पास ऐसा क्या है, जिसका हमें गर्व हो। हमारे पास किताबें ही तो हैं जिस पर हमें नाज हो। किताबें उस पर अपना स्नेह बरसात है, जो उसको पढ़ता है। किताबें हमारे मन में सद्भाव और शुभ कर्मों का उदय करने के लिए उतावली हैं। हमने एक हाथ में किताब थामें उधर किताबों ने अपना असर दिखाना शुरू किया। कमी किताबों में नहीं है, कमी हमारे में है। कोई भी किताबें अनुपयोगी नहीं हैं, कमतर हैं हम। किताबें हमेशा हमारे लिए उपलब्ध हैं, लेकिन हम किताबों के लिए हमेशा उपलब्ध नहीं रहते।
हमारे लिए महान किताबों को पढ़ने से बड़ा काम और क्या है। पढ़ना स्वयं में एक बड़ा काम है। महान किताबों को पढ़ने से बड़ा काम दुनिया में और कोई नहीं है। किसी काम को करने से बचिए, किताबों को पढ़ने के लिए अग्रसर होइए। हमारे यह आवश्यक है कि हम अपनी समस्याओं के समाधान किताबों में ढूँढें। यथार्थ में समस्याएँ दुनिया में नहीं है, समस्याएँ हमारे मन में है। मन के साथ क्या समस्याएँ हैं, उसे किताबें ठीक ढंग से बताती हैं।
किताबों को पढ़ने का मतलब है, किताबों में सुझाए गए विचारों के अनुसार अपने जीवन को दिशा और गति देना। उत्तम पुस्तकें, आदर्श ग्रंथ हमारे लिए किसी खजाने से कम नहीं। विचार करने की योग्यता तो किताबें देती हैं।
हमारे बैंक के खाते में जिस तरह हम हमेशा कुछ न कुछ रुपये-पैसे जमा करते रहते हैं, उसी तरह ही हमारी अलमारी में किताबें संग्रहित होते रहनी चाहिए। अच्छी किताबें कभी-कभी ही हाथ लगती हैं। वे जब भी मिले, उसे छोड़िए मत, अपनाइए। अच्छी किताबें वही हैं जो हमारी दुर्बलताओं, दुर्खों और समस्याओं को समझ लेती हैं। अच्छी किताबें वही हैं जो हमारे लिए क्या भला है और क्या बुरा है, यह बताती हैं। किताबों को हम अगर थाम लें तो वे हमें पतित होने से बचा लेंगी।
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रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।
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