दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार। हमारे वश की बात क्या है


आपने लोगों को अनेक अवसरों पर कहते सुना होगा कि यह मेरे वश की बात नहीं। सचमुच में कुछ बातें हमारी सीमा के बाहर होती है, इसलिए उदाहरण के लिए ऐसी बात लोगों को कहनी पड़ती है। हमारे वश में क्या है और क्या नहीं है, इसका पता कैसे चलता है? इसका चिंतन किया जाय। अनेक बातें सचमुच में हमारे वश में नहीं होतीं। यदि हम चाहेंगे कि स्त्री, बच्चे, मित्र, माता-पिता, कभी भी हमसे अलग न हों, यह अत्यंत अव्यावहारिक बात होगी, क्योंकि हम ऐसी चीज की चाह कर रहे हैं जो हमारे वश की नहीं है। ऐसे ही यदि हम चाहते हैं कि हमारा वफादार नौकर, मातहत, कर्मचारी, पड़ोसी आदि अन्य व्यक्ति कभी भूल न करे, तो यह हमारी नासमझी ही होगी, क्योंकि हम ऐसी वस्तु चाह रहे हैं जो संभव नहीं है। अनहोनी इच्छाओं में डूबे रहने के कारण मनुष्य को अतृप्ति का दुःख मिलता ही है। 

यदि बातों पर गहरी नजर डालकर देखें तो यह विदित होता है कि हम जीवन में अनेक ऐसी बातों की कामना करते हैं, जो साधारण रूप में संभव नहीं हो पाती। भले ही हम मानसिक, बौद्धिक या योग्यता की दृष्टि से किसी ऊँचे पद पर क्यों न हों। आप घर में अपने काम के लिए एक सुख वातावरण चाहते हैं पर वह आपको नहीं मिलता। आप परिवार के सभी सदस्यों के लिए बौद्धिक उत्थान चाहते हैं किंतु आपके पूर्ण ध्यान देने पर भी वे पर्याप्त रूप से पढ़ते-लिखते नहीं हैं। 

आप गली-मोहल्लों को साफ-सुथरा देखना चाहते हैं लेकिन कोई न कोई कूड़ा-करकट बाहर फैला ही देते हैं। जब भी आप कोई अच्छी किताब पढ़ने को बैठते हैं, बाहर से शोर-गुल मच जाता है। बाजार में जब आप कुछ खरीदने जाते हैं तो दुकानदार चुपचाप आपकी दृष्टि से बचकर खराब वस्तु आपके थैले में डाल देता है। कार्यालय में आप अपने से ऊँचे पदों पर आसीन अफसरों से जैसा शिष्ट व्यवहार की अपेक्षा करते हैं, वैसा आपको प्राप्त नहीं होता। 

ऐसी अवस्थाओं को देख कर आप कह उठते हैं, मेरे वश में कुछ नहीं। आपका मन कुम्हला जाता है। अच्छी गतिविधियों के लिए भी आपका उत्साह कम हो जाता है। पर क्या हम जीवन भर परिस्थिति और वातावरण की प्रतिकूलता के लिए समाज और लोगों को कोसते रहेंगे। कई बातें सचमुच में हमारे वश में नहीं होती लेकिन कुछ न कुछ बातें तो हमारे वश में रहती ही हैं। दूसरों के मनोभाव, उनकी आदतों और नजरिये में सुधार करना लगभग आज के समय में असंभव काम है। इनको लेकर मन को दुखी करना और स्वयं को असमर्थ महसूस करना सचमुच में नासमझी भरा काम है।

यदि हम चाहते हैं कि जीवन में असफलता, परेशानी या कठिनाई न आए, तो यह अत्यंत ही अव्यावहारिक बात है। वैसे जो जीवन बहुत सीधा सा मार्ग है लेकिन हमने अनेक उलझने खड़ा कर इसे बहुत उबाऊ और मुश्किल बना दिया है। हम जैसा चाहते हैं वैसा नहीं हो तो दुःख होता है। हम जैसा होने की कोशिश करते हैं उसमें परेशानी आती है तो रोष आता है। यह सब स्वाभाविक बातें हैं। जिस परिस्थिति से बच नहीं सकते, उसका सामना करने में ही भलाई है।

हमारे वश की बात क्या है? हमारे वश की बात है अपने में सुधार करना। अपने आपको चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार करना। अपने आपको इस तरह तैयार करना ताकि कभी मुश्किल हालात आने पर उसका सहजता और बुद्धिमत्ता से विजय हासिल किया जा सके। हमारा स्वभाव, हमारी आदतें, हमारा विचार करने का ढंग, मनःस्थिति, प्रतिक्रिया देने की कुशलता आदि हमारे वश की बातें हैं।

वास्तव में हम लोग स्वयं अपने प्रति उत्तरदायी हैं। सच में यदि हम अपने जीवन को सुचारू रूप से जीना चाहते हैं तो हमें उन्हीं बातों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए जो हमारे वश में है। उन्हीं बातों पर अधिक ध्यान दीजिए जिस पर आपका वश चलता है। इसका चौबीसों घंटे ख्याल रखना चाहिए कि हम अपनी शक्ति को केवल और केवल सकारात्मक कामों में ही लगाएँगे।


(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)

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