दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । क्या यहाँ सचमुच में सब मुफ्त है ?




महामारी ने हमारे जीवन को मुश्किल में डाल दिया है। मन को निराश और दुखी करने वाले समाचार आ रहे हैं। यह कैसा समय आ गया कि जीवन को आगे बढ़ाने के लिए और जीवन की रक्षा के लिए हमें हर चीज खरीदनी पड़ रही है। यहां तक की ऑक्सीजन भी खरीदनी पड़ रही है। आखिर मनुष्य क्या-क्या खरीदे। अभी के समय में अस्पतालों में इलाज कराना सचमुच पीड़ा दायक है। दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कीमतें इतनी अधिक हैं कि वह सामान्य आदमी के आर्थिक ढांचे को तहस-नहस कर डालती है। इसके परिणाम में मनुष्य बेबस, असहाय और दुखी है।

असमय मृत्यु पीड़ा दायक है। मानव जीवन की हानि सबसे बड़ी हानि है। जीवन को बचाने के लिए हर संभव कोशिश होनी ही चाहिए। हमारी आयु ही असली संपदा है। एक-एक सांस की कीमत हजारों रुपये मूल्य की हैं। लाखों रुपये इलाज-पानी पर खर्च हो रहे हैं। इस हिसाब से हमारा जीवन अमूल्य और मूल्यवान है। यह जीवन रूपी सम्पदा हमें प्रकृति द्वारा हमारे माता-पिता के माध्यम से मुफ्त में मिली है। लेकिन हम हैं कि इसे संभाल नहीं पा रहे। हम अपने जीवन के लिए उत्तरदायी हैं। हमारा शरीर स्वस्थ रहे इसका ध्यान हर समय रखना है। एक प्राण के मूल्य को कम न आकें।

विषैला धुआँ, मिलावटी खाद्य पदार्थ, मदिरापान, धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू आदि जीवन को हानि पहुँचा रहे हैं। इनसे हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण होती है। आयु घटती है। बीमारी बढ़ने की संभावना रहती है। मानव शरीर महान रहस्यमयी यंत्र है। कभी यह भारी संकट में साबुत बच जाता है और कभी जरा-सी ठोकर जीवन छीन लेती है। चाहे कुछ भी कहें जीवन की चाल बिगड़ने पर बड़ी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। शरीर की हानि न हो, इसके लिए हमें चौकन्ना रहना होगा। जीवन को संभाल कर और सहेज कर रखना होगा। हमारा जीवन कई लोगों के साथ जुड़ा है। वैसे तो मृत्यु जैसी कोई निश्चित वस्तु नहीं है और मरने का कोई निश्चित समय नहीं है।

प्रकृति की प्रिय संतान है मनुष्य। मनुष्य, वनस्पतियों एवं सभी जीवों का जीवन धरती व प्रकृति के अधीन है। हम जियें और दीघार्यु हों, धरती में केवल उसी का प्रबंध है। इसका प्रमाण यह है कि धरती ने मनुष्य को अपनी प्रत्येक वस्तु को मुफ्त में ही उपलब्ध कराया है। धरती सबकी जरूरतें अनंत काल पूरी करने के लिए सक्षम है। जीवन के सभी संसाधन जैसे हवा, पानी, अग्नि, पेड़-पौधे, धूप, मिट्टी, बारिश, नदी, पहाड़, जंगल, हरियाली सभी कुछ बिना शुल्क के सबके लिए समान मात्रा में उपलब्ध है। 

हम मनुष्यों ने इन सर्वसुलभ अमूल्य वस्तुओं को हानि पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हमारा लालच हमें ही नुकसान पहुँचा रहा है।  इसका दुष्परिणाम हमारे सामने है। कोरोना महामारी भी किसी बड़ी मानवीय त्रुटि का ही परिणाम है। बिना कारण के प्रकृति में कोई घटना घटित नहीं होती। जीवन तो मुफ्त में मिला है, लेकिन आज हमें जीवन की रक्षा हेतु भारी कीमत चुकानी पड़ती है। 

हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि प्रकृति अपने कार्य को हमेशा सही और क्रमबद्ध तरीके से करती है। उसके कार्य में त्रुटि नहीं हैं। कभी-कभी हम अपनी गणना में धरती और समय को शामिल नहीं करते। यह चूक हमारे पतन का कारण बनती है। धरती की अपनी निजी शक्तियाँ हैं। वह चाहे जो करे। हमारे जीवन से धरती को कुछ भी फर्क नहीं पड़ना है, जो होगा हमारी ही नुकसान होगा। प्रकृति की निरर्थक वस्तुओं को लेकर समय अलौकिक चमत्कार करता है। प्रकृति की बातें हमारी समझ के परे मालूम पड़ती हैं। 

प्रकृति हर बात पर प्रतिक्रिया देती है। प्रकृति हर चीज को गुणा करके हमें लौटाती है। धरती में एक बीज बोने पर वह किसी दिन पेड़ बनकर आगे वर्षों तक अनंत गुणा फल पैदा करते रहता है। एक मनुष्य में अनेक संतानें पैदा करने का सामर्थ्य है। एक पेड़ में अनंत पत्ते उग आते हैं। बात भली हो या बुरी प्रकृति का काम है उसे हजार गुणा करके लौटाना। जैसे बीज होंगे, वैसे ही स्वभाव वाले फल आएँगे। यह हमें देखना है कि हमने धरती में क्या बोया है?

(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)

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