दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार। विश्वास रखिए जीवन फिर मुस्कुराएगा




समय आने पर सारी विपदाएँ, सारी अड़चनें स्वतः ही दूर हो जायँगी। आप किसी प्रकार भी निराश, उदास और विषादग्रस्त मत होइये। भविष्य को संकटापन्न और अंधकारमय देखने का अर्थ है, प्रकृति की उदार एवं रहस्यमयी शक्ति पर विश्वास न करना है। विश्वास हीन जीवन उचित नहीं है। भावी जीवन को संकटमय न देखकर सुखमय देखने का संकल्प कीजिए। जो मनुष्य रात-दिन दुखी, क्लेशित, संकटापन्न और असफल ही होता है, उसके लिए आवश्यक है कि वह अपने के मोल को समझे और नई शुरुआत करे । यह सबके अनुभव की बात है कि मनुष्य की जैसी दृढ़ भावना होगी, वैसी ही परिस्थिति का निर्माण होगा और अंत में उसके साथ वैसी घटनाएं होंगी।

दुनिया में जो लोग अपने अनुकूल परिस्थिति को प्राप्त करके ही सुखी होना चाहते हैं, वे कभी सुखी होंगे ही नहीं, क्योंकि दुनिया में ऐसी कोई स्थिति है ही नहीं जो पूर्ण हो, जिसमें कोई अभाव न हो। जहाँ अभाव है वहीं प्रतिकूलता है तथा जहाँ प्रतिकूलता है वहीं दुःख है। दुःख से मुक्त तो वे ही होंगे, जो सावधानी के साथ हर समय अपने कर्तव्य का अधिकतम क्षमता के साथ पालन करते रहते हैं।

भविष्य के लिए शुभ विचार कीजिए। दुनिया में ऐसा कोई भी नहीं है, जिनके मन की इच्छाओं के अनुरूप की ही बातें हुआ करती हों। प्रकृति के विधान मानकर प्रतिकूलता में अनुकूलता का अनुभव करने से ही चित्त में शांति हो सकती है। जैसे ही प्रकृति के विधान में विश्वास करने लगेंगे, वैसे ही परिस्थिति भी बदलने लगेगी। प्रतिकूल भी अनुकूल होने लगेंगे। पर वे न भी होंगे, तो भी आपका क्षोभ तो मिट ही जायगा।

अनेक महापुरुषों ने यह स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारा यह शरीर और जीवन पाप और अपराध बटोरने के लिए नहीं है। अन्याय, कपट और दुर्भावना से मिली उपलब्धियाँ दुःख बढ़ाती हैं। भारतीय समाज की संरचना अन्य दूरस्थ देशों के समाज से कई दृष्टिकोणों से अलग है। यहाँ सेवा और सहयोग के बगैर काम नहीं चल सकता है। सबके हित और सुख के लिए स्वार्थ का विस्तार करना ही होगा। आज कोरोना महामारी के चलते लाखों लोगों पर विपदा आ खड़ी हुई है। यह कैसा विपरीत समय है कि जिसको भी अवसर मिल रहा है दूसरे को लूट लेना चाहता है – कभी अस्पताल में इलाज के नाम पर तो कभी महंगाई व वस्तुओं के अभाव का भय दिखाकर। जब सब तरफ विपदा आई है, सब संवेदनाशून्य व्यवहार करने में लगे हैं तो आप किससे किसकी शिकायत कर करेंगे। सचमुच में कुछ पीड़ा असह्य होती है। सचमुच में कुछ घटनाएं हमारे जीवन की दिशा को पूरी तरह घुमा देती हैं।

अच्छे भले चल रहे जीवन के घटनाक्रम तो समझ में आ जाते हैं लेकिन जब अचानक हमारे साथ कुछ ऐसा घटित होता जिसका कोई औचित्य समझ में नहीं आते या कारण को समझ पाना हमारी सामान्य बुद्धि से परे रहती है, उस पर हमारा कुछ भी वश नहीं चलता तो हमारे मन का परेशान हो उठना स्वाभाविक है। हम कह उठते हैं मेरे साथ ऐसे कैसे हो सकता है, यह दुःख मुझे और मेरे अपनों को ही क्यों मिल रहे? सचमुच में हमारे कुछ प्रश्न सदैव अनुत्तरित रह जाते हैं।

यह कैसा भी वक्त है, यह शिकायत का वक्त नहीं है। यह समझदारी दिखाने का वक्त है। आई हुई विपदा से कुछ सीखने का प्रयास कीजिए। समाज के ताने-बाने को समझने की कोशिश कीजिए। लोगों के व्यवहार को समझने का प्रयास कीजिए। आप घर में बड़े हैं, आप ही हिम्मत हार जाएँगे तो बच्चों का क्या होगा। परिस्थितियाँ कितनी भी बुरी हो आप विचलित मत होइए। समय में मरहम-पट्टी करने की शक्ति है। आपके मन में अथाह शक्तियाँ हैं। खुद हौसला रखिए और अपने परिजनों को मानसिक संबल दीजिए। थोड़ी-सी वस्तुओं और संसाधनों से काम चला लीजिए, लेकिन हिम्मत मत हारिए। देखिएगा कुछ दिनों में जीवन फिर मुस्कुराएगा। किसी महान किताब के दो-चार पन्ने अवश्य पढ़िए। यह समय बहुत मूल्यवान है। 

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