दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । मन की शक्तियों को जगाती हैं किताबें
23 अप्रैल को हमने पुस्तक दिवस मनाया। आइए विचार करते हैं कि वास्तव में पुस्तकों का हमारे जीवन में क्या महत्वहै। मनुष्य के पास केवल एक मन है, जो उसके लिए अलादीन का चिराग है। यह मन ही सर्वशक्तिमान है। इस मन की तीन शक्तियां हैं – जानने, मानने और करने की। हम कुछ भी करते हैं इन्हीं तीन शक्तियों के मिश्रण द्वारा ही करते हैं। यह तीनों शक्तियाँ ठीक-ठीक काम करेंगी तभी जीवन की गतिविधियां ठीक रहेंगी। हमें किन बातों को जानना चाहिए, मानना चाहिए और समझना चाहिए,यह बहुत ही जटिल कार्य है। इनमें उलट-पुलट हो जाने पर समस्या बढ़ती है।
किताबें हमें बताते रहती हैं कि हमारे लिए क्या उचित हैं और क्या अनुचित हैं। किताबें मेरे मन का सर्वोत्तम आहार हैं। यदि आप कम समय में बहुत अधिक अनुभव संग्रहित करना चाहते हैं तो एक ही मार्ग है – पुस्तकें। पुस्तक पढ़ने से जितना अधिक हमारा हित होता है, उतना किसी और कार्य से नहीं होता। किताबें ही मन की शक्तियों को जगाती हैं।
पुस्तकें ही जागृत देवता हैं। किताबें महान मार्गदर्शक एवं गुरु हैं। महान लोग के मूल्यवान विचार किताब में संग्रहित किए गए हैं। यदि आप अपने मन, बुद्धि, विचार आदि का उत्थान करने के लिए पढ़ते हैं तो उसे स्वाध्याय कहते हैं। किताबें ही हमें विचारवान बनाती है तथा हमें सुधारती हैं। किताबें ही हमें अपनी कमजोरियों के प्रति जागरूक करती हैं। किताबों के बिना आधुनिक जीवन का कोई कार्य संपन्न नहीं होता।
शरीर को प्रत्येक दिन भोजन के माध्यम से संचालन ऊर्जा मिलती रहती है, किंतु हमारा मस्तिष्क समुचित अध्ययन के अभाव में, उच्च विचारों की कमी से दुर्बल रह जाता है।
मनुष्य केवल शारीरिक ढाँचे से नहीं बल्कि अपनी मानसिक शक्तियों से योग्य और महान बनता है।स्वाध्याय की अवहेलना करने से व्यक्ति अपनी असीम संभावनाओं से परिचित नहीं हो पाता है। अपरिपक्व और निरुपयोगी व्यक्ति की आज के समाज में कोई पूछ-परख नहीं है। अपरिपक्वता की काली छाया जीवन को अंधकारमय बना देती है।राष्ट्र में मानसिक रूप से अपरिपक्व लोगों की अधिकता समाज को दिशाहीन कर देता है और सामाजिक मूल्यों के विघटन का कारण बन जाता है। विचारवान लोग ही राष्ट्र की बहुमूल्य मानवीय संपदा हैं।
समाज को संचालन ऊर्जा, स्वाध्याय जनों एवं गुणीजनों के कर्मों,व्यवहार और विचारों से ही प्राप्त होती है। अतः स्वाध्याय के संस्कार को बढ़ावा मिले इसके लिए सामाजिक स्तर पर सुनियोजित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। स्वाध्याय के संस्कार विकसित करके व्यक्ति असंभव समझे जाने वाले कार्यों को भी संभव कर लेता है। यही स्वाध्याय की महान संभावना और शक्ति है। महान कार्य करने की प्रेरणा उस विशिष्ट अवस्था में मिलती है जब अध्ययनशीलता घनीभूत होकर अपनी चरम अवस्था पर पहुँच जाती है। ऐसी दुर्लभ अवस्था प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति के भाग्य में नैसर्गिक रूप से विद्यमान रहता है।
अपने जीवन में जो लोग भी उन्नति कर पाए हैं और जिनके विचारों,चरित्र, और कृतियों का समाज अनुसरण करता है,वे सभी अत्यधिक स्वाध्यायी थे और अध्ययनशीलता के प्रबल समर्थक थे। महान लोगों ने अपने श्रेष्ठ ज्ञान को बौद्धिक सम्पत्ति का स्वरूप देकर, हमारे लिए वसीयतनामा छोड़ रखा है,जिसे पढ़ना प्रत्येक व्यक्ति का परम कर्त्तव्य है। उच्च कोटि के साहित्यों के स्वाध्याय से असीमित मानसिक ऊर्जा प्राप्त होती है। स्वयं के परिश्रम द्वारा महानतम साहित्यों का अध्ययन करना हर मनुष्य के लिए आवश्यक कर्म है।
मनुष्य की शक्ति उसके मन में छुपी है। उच्चकोटि के साहित्यों का अध्ययन करके ही अपने विचारों और इरादों को उन्नत बनाया जाता है। हर व्यक्ति कुछ न कुछ अच्छी किताब रोज पढ़े। इससे मानसिक बल मिलता है। साहित्य ही मानव का असली साथी है।
(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)
(चित्र स्त्रोतः https://medium.com/age-of-awareness/mind-food-765aeff1eb92)



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