प्रेरणादायी लेखः रुसेन कुमार । कर्म का कोई मुकाबला नहीं
यह एक ऐसा व्यावहारिक लेख जिसे पढ़कर ग्रामीण क्षेत्र युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन और प्रेरणा मिलेगी। साथ ही सफलता की जटिलताओं को समझने में आसानी होगी।
मुझे अनेक सफल लोगों से प्रत्यक्ष मुलाकात करने का अवसर मिला। साथ ही मैंने सफलता दिलाने वाली सैकड़ों किताबों और लेखों का अध्ययन किया। अपने युवा साथियों को अपने अनुभव से कुछ बातें बताना चाहता हूँ साथ ही साथ कुछ उपयोगी सुझाव भी देना चाहता हूँ।
सफलता एक सुनियोजित तैयारी का नतीजा होती है। कोई भी व्यक्ति रातों-रात सफल नहीं हो सकता। जो भी सफल हुए हैं या वर्तमान में सफल के शिखर पर हैं वे एक-एक कदम बढ़ाकर ही वहाँ पर पहुँचे हैं। मनुष्य अपनी शारीरिक ऊँचाई या मोटापे से बड़ा नहीं होता। आदमी बड़ा बनता है इरादों से। युवा अपने लिए उन्नत इरादे मन में संजोयें। हर युवा सफलता पाने के लिए मन में जिद्द पैदा करे। बंधनों से मुक्ति पाने के लिए मन में छटपटाहट और प्यास पैदा करे।
वैसे तो अनेक बातें सफलता के लिए जिम्मेदार होती हैं, लेकिन कुछ बातें सार्वभौम होती हैं। वे सभी समय में सभी के लिए प्रासंगिक रहती हैं, उपयोगी होती हैं। उन्हीं कुछ बातों का यहाँ उल्लेख कर रहा हूँ। ग्रामीण युवाओं के लिए सफलता के 5 सबक सुझाते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यहाँ सुझाई गई बातें अत्यंत ही व्यावहारिक हैं। आप किसी बात से नाराज और निराश मत होइए। आप में महान गुण पहले से ही है। उस पर यकीन कीजिए। यह बात अच्छे से अपने मन में दृढ़ कर लीजिए कि गरीबी या आर्थिक अभाव कुछ भी बाधा उत्पन्न नहीं करते।
1. सफल लोगों के साथ काम कीजिए
यदि आप सफल होना चाहते हैं तो पहले उन लोगों के साथ कुछ समय तक काम कीजिए जिनको भी आप सफल मानते हैं या उनके कार्यों से आपको कुछ प्रेरणा मिलती है। सीखने में संगति का सर्वाधिक योगदान रहता है। मनुष्य ने कुछ भी सीखा है उसमें देखकर, सुनकर सीखने का ज्यादा योगदान होता है। सफल लोग किस तरह के व्यवहार करते हैं, इसकी जानकारी होने पर उसको जीवन में उतारना सरल हो जाता है। सफल लोगों के व्यवहारों का अनुकरण करने में कोई बुराई नहीं है। चाहे कितनी ही उम्र का आदमी हो, यदि उसने साइकिल नहीं चलाई है तो उसे साइकिल चलाना सीखना ही होगा। जो सीखे हुए लोग हैं, वे जल्दी सिखा सकते हैं। उनको देख-देख कर, उनकी बातों को सुन-सुन कर हम बहुत सारी बातों को जान सकते हैं। अनुभव हमेशा काम आता है।
2. कर्म कीजिए
सफल होने के लिए बहुत सारा ज्ञान नहीं चाहिए। बल्कि बहुत सारा कर्म चाहिए। किसी के पास बहुत ज्ञान है और वह कर्म नहीं करता इसके विपरीत कोई अल्पज्ञान रखते हुए भी कर्म करता है तो उसका मुकाबला नहीं किया जा सकता। कर्म में अथाह शक्तियाँ होती हैं। अपना कोई भी पसंदीदा काम ढूंढ लीजिए। इसमें देरी मत कीजिए। उस काम को लोगों और समाज की जरूरतों के हिसाब से ढाल लीजिए। बड़े नहीं तो छोटे ही काम कीजिए। छोटे नहीं तो उससे भी छोटे काम कीजिए। लेकिन कोई काम अवश्य कीजिए। कर्म का कोई मुकाबला नहीं। आप सच मानिये महाज्ञानी भी किसी अल्पज्ञानी के छोटे से कर्म का मुकाबला नहीं कर सकते। सिखाने वाले, मार्गदर्शन करने वाले, शिक्षा देने वाले बहुत हैं – उसका मोल तभी है जब आपके पास कोई कार्य है। हर कार्य में व्यापार के अवसर छुपे रहते हैं। यदि किसी ने कोई बड़ा गड्ढा खोदा है तो उसमें कुछ न कुछ तो अवश्य ही गिरेगा। यदि किसी ने पेड़ लगाया है तो उसकी छाया तो अवश्य ही मिलेगी।
3. धन के बारे में समझ बढ़ाइए
बहुत से सफल लोगों को अक्सर यह शिकायत रहती है कि वे धन तो बहुत कमाते हैं लेकिन उनके पास बचता नहीं है। धन को कमाना और उसे बचाए रखना दो अलग-अलग कार्य हैं। रुपये-पैसे कमाने के लिये योजना और श्रम चाहिए लेकिन उसे बचाने के लिए अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण चाहिए। अनियंत्रित इच्छाओं के कारण ही हमारे पास रुपये-पैसे जमा नहीं हो पाते। बचाया गया धन ही वास्तव में सर्वोत्तम होता है। यदि घड़े में छेद है तो कितना भी पानी आए बह जाएगा। धन संग्रह से मन की शक्ति बढ़ती है। आत्मविश्वास बढ़ता है। धन रहने से विपरीत परिस्थितियों से लड़ जाने का दम रहता है। आलपिन से लेकर सोना तक – आज के समय में प्रत्येक वस्तु रुपये-पैसे खर्च करने के उपरान्त ही मिलते हैं। जो भी धनवान हुए हैं, निःसंहेद ही उनके पास धन बचाने की समझ थी। कुछ वर्ग विशेष के लोग धनी होते हैं, इसका कोई न कोई कारण तो अवश्य होगा।
4. व्यवहार सीखिए
व्यवहार का बहुत मूल्य है। यदि आप किसी क्षेत्र में सफलता चाहते हैं तो व्यवहार करना सीखिए। आपके व्यवहार ही आपको आगे बढ़ाएगा। व्यवहार कुशल लोग हमेशा किए जाते हैं। दरअसल हमें लोग ही आगे बढ़ाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को यह भ्रम रहता है कि वह अपने ज्ञान के कारण आगे बढ़ रहा है। ज्ञान बुनियादी और अदृश्य बात है लेकिन व्यवहार प्रत्यक्ष होता है। अच्छे व्यवहार को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं पड़ती। यदि आप स्वयं को सुगंधित पुष्प मानेंगे तो आपका व्यवहार आपकी सुगंध है। व्यवहार में त्रुटियों के कारण हम जिनसे मिलते हैं, उसे खो देते हैं। हमारा व्यवहार जोड़ने वाला होना चाहिए। व्यवहार कुशल बनने के लिए आपको अभ्यास करना होगा। आप दिन भर लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं - कैसा जवाब देते हैं, कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, कितनी तेज आवाज में बोलते हैं, औरों की बातों को कितना सुनते हैं – प्रत्येक रात को सोने से पहले इसका अवलोकन कीजिए। अपनी डायरी में सुधार के उपाय लिखिए।
5. हानि पहुँचाने की कोशिश न कीजिए
जब आप समाज में व्यवहार करेंगे तो आपको अनेक मौकों पर निराशा हाथ लगेगी। आप अपने प्रति जैसा चाहेंगे वैसा मिलना दुर्लभ होगा। क्योंकि आप अक्सर गलत जगह पर गलत व्यवहार कर रहे होंगे। आपके मन में रोष उत्पन्न होगा और बहुत संभव है कि आप लोगों को हानि पहुँचाने की कोशिश में लग जाएंगे। जो लोग अपने लिए ऊँची सफलता चाहते हैं उन्हें कभी भी दूसरों को हानि पहुँचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। मुसीबतों को सह लेना चाहिए, हानि को सहन कर लेना चाहिए, लेकिन दूसरों को हानि पहुँचाने का उपक्रम नहीं करना चाहिए। कौन आगे बढ़ेगा, कौन सफल होगा, इसको तय होने में कुछ वर्ष लग ही जाते हैं। हानिकारक लोगों से उलझने की कोशिश मत कीजिए। कौन भला है, कौन बुरा है, इसका फैसला करने मत बैठ जाइए। आप अपनी ऊर्जा को सृजन करने में, सीखने, जानने, समझने में लगाइए। आप केवल अपने रास्ते पर आगे बढ़िए। भीतर से सम्पन्न बनिये। अंतःकरण की सम्पन्नता को बढ़ाइए।
(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)



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