साक्षात्कारः रुसेन कुमार । महान एवं मूल्यवान विचारों को जनमानस तक पहुँचाना ऊँची सेवा है




रुसेन कुमार हमारे पोर्टल जनसंवाद के लिए नियमित लिखने लगे हैं। उनकी लेखनी में दिलों को छूने लेने की शक्ति है। वे गूढ़ बातों को भी इतने सहज ढंग से समझाते हैं कि उसे कोई बच्चा भी समझ जाय। उनके लेखों को पढ़कर ऐसा अनुभव होता है कि उसे अनेक विषयों का गहन ज्ञान है। उनके विचार बहुत स्पष्ट और किसी पूर्वाग्रह से रहित होते हैं। उनके लेखों को पढ़ने से मन में समृद्धि आती है। वे जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। अपने सुविज्ञ पाठकों को बताना चाहूँगा कि यह युवा हमारे ही आसपास का है। 

उनकी पढ़ाई-लिखाई हमारे कसडोल और बलौदाबाजार में हुई है। मेरी उनसे मुलाकात कसडोल में कालेज के समय ही हुई। उसने कॉलेज के समय में ही अपनी अद्भुत लेखन प्रतिभा का परिचय दिया था। वह अत्यंत सहृदय इंसान न जाने कब मेरा परम मित्र बन गया। सदा से ही मैंने उसे अपना मेरा सच्चा हितैषी मित्र पाया है। हमने न जाने जीवन के कितने दुर्दिन सहे और संघर्ष किए और उस पर विजय पाई। 

मैं जहाँ तक समझता हूँ आज उनकी रचनाओं में जो सरलता आई है वह उसकी तपस्या का ही फल है। इस युवा को हमेशा परिमार्जित करते हुए ही देखा है। वास्तव में 20 वर्षों  की अध्ययनशीलता एवं लेखन साधना ने ही उसे संवारा है। उसने विचारों की यह शक्ति कैसे पाई, यह जानना हमारे पाठकों के लिए बहुत रोचक होगा। 

रुसेन कुमार उद्यमी, विचारक, पत्रकार एवं कुशल लेखक हैं। उनकी 5 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। कई किताबें प्रकाशनाधीन हैं। अखबारों के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं। इंडिया सीएसआर नेटवर्क के संस्थापक एवं प्रबंध संपादक हैं।

रुसेन कुमार से जनसंवाद के लिए संपादक राजेश मिश्रा की बातचीत के संपादित अंश प्रस्तुत हैंः

प्रश्नः लॉकडाउन और कोरोना को लेकर आपके क्या विचार हैं?

जवाबः सचमुच में हम सबके लिए यह बहुत ही कठिन समय है। यह उथल-पुथल का दौर है। इस बीमारी से बचकर और संभलकर रहना ही एकमात्र उपाय है। हजारों-लाखों ने नौकरी खोई, रोजगार गंवाए और उनसे उनके प्रिय जन सदा के लिए बिछड़ गए। हमारे साथ हुई बुरी घटनाएं हमारे जीवन को झकझोर देती हैं ।  

यह समय सावधानी बरतने का है। लॉकडाउन और कोरोना ने इस बात का बोध कराया है कि हमारा  जीवन कितना मूल्यवान है और दूसरों के कार्यों और सेवा का कितना महान महत्व है। आज हम असहाय हैं लेकिन हजारों लोग हमारी सेवा और सहायता के लिए आतुर हैं। सचमुच में हमारा समाज कितना उदार और दयालु है। यह एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाने का समय है, सहायता करने का समय। यह पुनर्विचार करने का भी समय है। 

घर परिवार, समाज और राष्ट्र की खुशहाली हमारे लिए कितना आवश्यक है इसका चिंतन करने का यह उचित समय है। इस विपदा काल की सार्थकता तभी है जब हम यह प्रण कर लें कि आज से लोगों और राष्ट्र को हानि पहुँचाने वाले कार्य बिल्कुल ही नहीं करेंगे। हमारा जीवन दूसरों के सहयोग और समन्वय से ही चलता है। यदि हम किसी रूप में सक्षम हैं तो सहायता अवश्य करनी चाहिए। 

प्रश्नः आप अपना समय किस तरह बिता रहे हैं?

जवाबः लॉकडाउन और कोरोना काल में अनेक पाबंदियाँ हैं। मेरे विचार से यह पाबंदियाँ केवल आने-जाने और शरीर तक ही सीमित है। यह पाबंदियाँ मन के स्तर पर लागू नहीं होती। हमारे मन पर कोई बंदिश नहीं है। हम पढ़ सकते हैं, लिख सकते हैं। मेरे लिए यह पढ़ने-लिखने का यह महान अवसर है। यह मेरा समय बहुत मूल्यवान है। मन में जमी गंदगी की साफ-सफाई करने का यह दुर्लभ अवसर है। दिन के 8 घंटे पढ़-लिखते, स्वाध्याय करते और चिन्तन करते हुए बिताता हूँ। 

अच्छी बातों को समाज तक पहुँचाया जाये, इसका प्रयास रहता है। महान एवं मूल्यवान विचारों को जनमानस तक पहुँचाना ऊँची सेवा है। समाज में आज अच्छे विचारों के प्रचार-प्रसार की महति आवश्यकता है। मूल्यवान विचारों और जीवनोपयोगी बातों को जनमानस तक पहुँचाना हम युवाओं का महान उत्तरदायित्व है। उत्साह, हौसला और प्रेरणा जगाने वाले विचार इस कठिन समय में हमारा संबल बन सकते हैं। हम युवाओं को चाहिए कि हम अपने विचारों को उन्नत बनाएँ और उसमें सार्थक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। 

प्रश्नः हमारे विचार करने के ढंग में कितना सुधार हुआ है। विचारों की कितनी उन्नति हुई है, इसका पता किन बातों से चलता है?

जवाबः हमारे में कितना सुधार हुआ है, इसका पैमाना है विनम्रता की प्रगाढ़ता। विनम्रता बढ़े और अकड़ घटे, मेरे दृष्टिकोण से यही विचार उन्नतिकरण का पैमाना है। पहले मैं स्वयं को ज्ञानी समझता था, अब मैं अपनी मूढ़ताओं पर गौर करता हूँ। पहले स्वयं की गलती पर भी दूसरों को ही दोषी ठहराता था, अब अपनी गलतियों के लिए शर्मिंदगी व्यक्त करता हूँ। पहले समझता था कि मेरी भी समाज में कुछ हैसियत होनी चाहिए, पर अब यह बात मेरी समझ में आई है कि समाज की सेवा में ही समय लगाना है। पहले मैं स्वयं को काबिल और भला समझता था, अब यह बात समझ में आई है मुझसे खराब व्यक्ति दुनिया में कोई नहीं है। पहले मैं समझता था कि कि मैं बहुत प्रेमी किस्म का आदमी हूँ, अब यह बात मेरी समझ में आई है कि मेरे भीतर छल और नफरत का गुब्बार है। पहले मैं अपेक्षा करता था कि मुझे कोई सम्मान दे, आदर दे, पर अब यह बात ठीक से समझ में आ गई है कि मुझमें सम्मान योग्य कोई बात नहीं। पहले मैं समझाया करता था कि औरों को क्या-क्या करना चाहिए, अब मुझे क्या-क्या करना चाहिए, उसी का चिंतन रहता है। 

धन्यवाद रुसेन कुमार, हमारे पाठकों के साथ अपना महत्वपूर्ण समय और विचार साझा करने के लिए। जनसंवाद परिवार आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। 

स्त्रोतः https://jansamwaad.in/2021/04/19/1567/

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