दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । एक मिनट का स्वर्ग रचिए






स्वर्ग यानी वह स्थान और वह समय जहाँ पर मन को सुकून मिले। मन को तनाव नहीं मिले। हर किसी को अपने लिए रोज एक स्वर्ग चाहिए। हर किसी को अपने लिए हर घंटे एक स्वर्ग चाहिए। स्वर्ग चाहिए मतलब शांति चाहिए। शांति चाहिए मतलब सब बातें उसके मन के मुताबिक हो। मन के मुताबिक होने से अल्पकालिक खुशी मिलती है। अपने मन के अनुसार यदि कोई बात हो जाए तो वह एक लघु स्वर्ग है।

मन एक बहुत बड़ा भूखा शैतान है जो कभी संतुष्ट नहीं होता। असंतुष्टि मन का स्वभाव है। मन को बिना काम के छोड़ दिया जाय तो भी वह संतुष्ट नहीं रहेगा। उसे दुनिया भर का सुख, आनंद, सम्पदा दे दीजिए तो भी, वह केवल थोड़ी देर के लिए ही खुश होगा। स्थायी रूप से मन को सुखी दे पाना असंभव है।

मन की चंचलता को समझना आवश्यक है। शांति चाहिए मन को। मन की शांति ही स्वर्ग है। मन की खुशहाली ही स्वर्ग है। मन को केवल और केवल एक ही चीज चाहिए वह है खुशी। मन को हर पल खुशी चाहिए। अच्छे कार्य ही मन में खुशी का उत्पादन करते हैं। मन को किसी अच्छे कार्य में लगाए रखना ही स्वर्ग का निर्माण करना है। जिन्हें भी स्वर्ग का निर्माण करना है वे खुशी सृजन का उपाय करें।

दुखदायी कार्य करने का मतलब है अपने को नर्क में धकलेना। शरीर को कष्ट दिलाने वाले कार्य करने से परहेज कीजिए। मन को व्यथित करने वाले कार्यों और विचारों को बार-बार मत दोहराइए। दूसरों के मान-सम्मान को आहत करने वाली बातें मत कहिए। दुख का नाम ही नर्क है। नारकीय जीवन में स्वर्ग नहीं आ सकता।

मन को किसी सुखद कार्य में ठहराए रखना ही स्वर्ग बनाने जैसा कार्य है। अपने आसपास के वातावरण को सुखद बनाने की छोटी सी कोशिश कीजिए। छोटी-छोटी कोशिश का बड़ा महत्व है। यदि हम सचमुच में खुशी का खजाना चाहते हैं तो हमें अपने समय को छोटी-छोटी खुशियों का संग्रह करने में लगाना चाहिए। स्वर्ग के साम्राज्य में प्रवेश करने के लिए खुशी देने वाली बातों का संग्रह तैयार करना होगा। इसके लिए हमें समय का सदुपयोग करना सीखना होगा। समय, खुशी, मन, शांति, सदुपयोग यह सभी स्वर्ग रचने की सामग्रियाँ हैं। इन्हीं से ही स्वर्ग का निर्माण होता है।

स्वर्ग निर्माण करने की सामग्रियाँ और संसाधन हमारे पास पहले से ही मौजूद रहते हैं। प्रकृति ने हमें सब कुछ पहले ही से दे रखे हैं। उन्हें जानना और समझना है। प्रकृति ने हमें बुद्धि दी है, हृदय दिया है। हम इन्हीं का सदुपयोग करके अपने लिए स्वर्ग का निर्माण कर सकते हैं। अपने लिए स्वर्ग का निर्माता हम स्वयं ही होते हैं। यदि हम अपने लिए स्वर्ग स्थल बनाने का कार्य किसी और को देंगे तो वह हमारे मुताबिक उसे ठीक नहीं बना पाएगा।

एक-एक मिनट का स्वर्ग रचकर अपने घंटे को स्वर्ग में रूपान्तरित कर सकते हैं। घंटों को स्वर्ग में रूपान्तरित करके पूरे दिन को स्वर्ग बना सकते हैं। एक मिनट का स्वर्ग रचने की विधि आपको बताता हूँ। एक प्रेरणादायी किताब पढ़िए। जो बातें आपको महत्वपूर्ण लगे उसे अपने हैंडराइटिंग में अपनी डायरी में लिखिए। मनीप्लांट का पौधा लगाइए। पौधों को पानी दीजिए। पौधों के पत्तों में जमी धूल को पोछ डालिए। कोई पेंटिंग बनाइए। कविता लिखने की कोशिश कीजिए। किसी प्रियजन को पत्र लिख डालिए। कोई लेख लिखकर अखबार में भेज दीजिए।

अपनी अलमारी के कपड़ों को व्यवस्थित कर लीजिए। अपने टेबल की सफाई करके उसे नए ढंग से सजा लीजिए। अपने बच्चों के साथ कोई मनोरंजक गेम खेलिए। अखबार में कोई उपयोगी बात छपी है उसे काट करके रख लीजिए। बचपन के किसी मित्र से कुछ मिनट बात कीजिए। उच्च कोटि के विद्वानों और कलाकारों के विचारों को सुनिये। किताबों को व्यवस्थित कर लीजिए।

मूल्यवान विचारों के प्रिंट आउट निकालकर अपने नोटिस बोर्ड पर सजा लीजिए। किसी प्रियजन को कोई उपहार भेज दीजिए। कोई वाद्ययंत्र बजाना सीखिए। बेजुबान प्राणियों को दाना-पानी दीजिए। जो भी कीजिए मन लगाकर कीजिए। जो लोग भी ऐसा करेंगे अपने लिए स्वर्ग का निर्माण करते हैं।

यह सदैव स्मरण रखिए कि समय का सदुपयोग करना ही अपने लिए स्वर्ग का निर्माण करना है। यह भी ध्यान रखिए कि आप किसी और के कार्य में दखल मत डालिए। आपको जो करना चाहिए वह कीजिए। आपको निश्चित ही शांति और सुखद अनुभव होगा। 

आइए, हम सब मिलकर अपने जीवन को तथा अपने देश को स्वर्ग से भी सुंदर बनाने का उद्यम करें। 

(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं  लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।) 

(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)

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