रुसेन कुमारः अशोक गहलोत द्वारा मजदूर दिवस पर राजस्थानवासियों को 5 लाख रु. की निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा योजना का उपहार


सभी तरफ कोरोना महामारी फैली हुई है और लाकडाउन के कारण जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, ऐसे विपरीत समय में कांग्रेस शासित राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने जनता के कल्याण के लिए एक लाभकारी योजना प्रारंभ की है। 

3,500 करोड रुपये लागत वाली इस योजना से राजस्थान के प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष पाँच लाख रुपए तक का निःशुल्क चिकित्सा बीमा मिल पाएगा। पॉलिसी धारक को एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपचार कराने की पात्रता होगी। योजना का लाभ लेने के लिए परिवार के आकार एवं उनकी आय की सीमा का किसी प्रकार बंधन नहीं रखा गया है।

लाभार्थियों की संख्या और सुविधाओं के व्यापाक स्वरूप के होने के कारण यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज लागू करने वाला राजस्थान एक अग्रणी सरकार बन गया है। यह योजना जनता के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। हमारे देश में आज भी लाखों लोग सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते। जनता में आज भी स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जागरूकता का अभाव देखा जाता है। ऐसे में इस तरह की योजना का जनमानस की मनोवृत्ति पर स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। 

दूसरी बात यह भी है कि अभी के समय में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारों को अधिक से अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। साथ ही साथ जीवन शैली, जानलेवा बीमारियों और स्वास्थ्य के विषयों के बारे व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। 

इसमें कोई संदेश नहीं कि राजस्थान जैसे विशाल जनसंख्या वाले राज्य में इस तरह की कल्याणकारी योजना से राज्य की जनता को कम से कम आर्थिक बोझ पड़ेगा। 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की खराब एवं ढुलमुल नीतियों के कारण पिछले 7 वर्षों में देश में लाखों-करोड़ों लोगों की आजीविका छिन गई है। नोट बंदी, जीएसटी, कोरोना महामारी और क्रमबद्ध पीड़ादायक देशव्यापी लाकडाउन ने ग्रामीण भारत का जीना दूभर कर दिया है। कोरोना महामारी में समुचित इलाज व्यवस्था के अभाव में लोगों की असमय मृत्यु हो रही है। 

ग्रामीण भारत के लोगों को कई किलोमीटर पहुँच कर अस्पताल पहुँचना पड़ता है और उनके साथ वहाँ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। अस्पतालों में भारी फीस जमा करने के लिए लोगों को अपने घर, मकान, गहने और खेत आदि बेचने पड़ते हैं। 

इस विपरीत समय में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की यह पहल निःसंदेह ही राज्य के लाखों गरीबों के लिए अर्थिक राहत देने वाली साबित होगी। 

अशोक गहलोत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सपनों के अनुरूप कल्याणकारी योजनाओं को समाज के कमजोर वर्ग तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। यह योजना उसी का ही प्रमाण प्रदर्शित करती है। भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी योजना को ज्यादा स्पष्ट बनाना होगा। राज्य सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की जरूरत है। अशोक गहलोत जमीनी जननेता हैं उन्हें राज्य की जनता दुःख-दर्द और जरूरतें भली-भाँति मालूम है।


इस योजना के बारे में थोड़ी चर्चा करते हैं। इस योजना को मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना नाम दिया गया है। इस योजना की यहाँ चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी शुरुआत 1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर की गई है। 1 अप्रैल 2021 से इसका पंजीकरण प्रारंभ कर दिया गया था। सरकार ने बताया है कि इस योजना से राजस्थान के लगभग 22.85 लाख परिवारों को जोड़ा गया है। 

इस प्रकार की योजना प्रारंभ करने की इच्छा बजट घोषणा 2021-22 में की गई थी। इस घोषणा को अमल में लाने के लिए यह योजना प्रारंभ की गई है। जो परिवार अब तक इस योजना से जुड़ चुके है उन्हें 1 मई 2021 से लाभ मिलने लगेगा। 31 मई 2021 तक इसमें जो परिवार शामिल होंगे उन्हे पंजीकरण की तिथि से लाभ मिलेगा। 

राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया का कहना है कि इस योजना के लागू होने पर सरकार पर लगभग 3,500 करोड़ रुपये का भार आएगा। इस योजना के द्वारा लोगों का गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

बताया गया है कि योजना में विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिये 1576 पैकेजेज और प्रोसिजर बनाये गए हैं। मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से 5 दिन पहले का चिकित्सकीय परामर्श, जांचें, दवाइयाँ तथा डिस्चार्ज के बाद के 15 दिनों के संबंधित पैकेज से जुड़े चिकित्सा व्यय भी निःशुल्क उपचार में शामिल होंगे। 


बताया गया है कि राज्य के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सामाजिक-आर्थिक जनगणना के लगभग 1 करोड़ 10 लाख योग्य परिवारों के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदाकार्मिकों, लघु और सीमांत किसानों और कोविड-19 अनुग्रह राशि प्राप्त करने वाले निराश्रित और असहाय परिवारों का शत प्रतिशत प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।

इसके अलावा 850 रुपए के प्रीमियम का भुगतान करके प्रदेश के लगभग 76 लाख अन्य परिवार भी इस योजना में 5 लाख तक के स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकते है तथा ऐसे परिवारों के शेष 50 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान भी सरकार द्वारा किया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा लाभार्थियों के हित में कोरोना और डायलिसिस के उपचार के पैकेजेज भी योजना में जोडे गए है। योजना के बेहतर संचालन और भ्रष्टाचार को रोकने के लिये एन्टी फ्रॉड यूनिट बनाकर क्लेम की मॉनिटरिंग और ऑडिट कर एक पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जायेगा।

योजना में पंजीकरण के लिए जनता को स्वयं ऑनलाइन अथवा ई मित्र के माध्यम से योजना की वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होता है। ई-मित्र केन्द्र पर पंजीकरण करवाने पर लाभार्थी को किसी भी प्रकार के शुल्क का भुगतान नहीं पड़ता। पंजीकरण हेतु सफल आवेदन का शुल्क, प्रीमियम जमा शुल्क एवं प्री प्रिन्टेड कागज पर पॉलिसी दस्तावेज के प्रिंट आदि के शुल्क राज्य भी सरकार ही वहन करती है। 

राज्य के 765 सरकारी और 330 से अधिक संबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर 5 लाख रुपए तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। हार्ट, कैंसर, किडनी, डायलिसिस और कोविड-19 जैसी गंभीर बीमारियों सहित 1576 प्रकार के पैकेज और प्रोसीजर की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अस्पताल में भर्ती के 5 दिन पूर्व और डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक का चिकित्सा व्यय को योजना में शामिल किया गया है। योजना के लिए अस्पताल में भर्ती होने की शर्त रखी गई है। 

सरकार ने बताया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सामाजिक-आर्थिक जनगणना के लगभग 1 करोड़ 10 लाख योग्य परिवारों को रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं हैं। उन्हें योजना का लाभ स्वमेव मिलने लगेगा। 

सरकार ने विज्ञापन प्रकाशित करके यह स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों को इस योजना से जुड़ने की जरूरत नहीं है क्योंकि क्रेंद्र सरकारी की सीजीसीएस की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा आरजीएचएस लागू की जा रही है। 

इस योजना की नोडल एजेंसी राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग) है। यह संस्था राज्य सरकार के अधीन कार्य करती है। 

क्रियान्वयन एवं निगरानी की चुनौतियाँ

स्वास्थ्य सेवाओं की सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है। राजस्थान में जहाँ साक्षरता प्रतिशत केवल 67.06 प्रतिशत है। इस हिसाब से इस स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में भारी चुनौती आएगी। जनता को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने में सबसे बड़े बाधक निरक्षरता और अंधविश्वास हैं।

क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य होने के बावजूद यह राज्य जनसंख्या के मामले में 5वें स्थान पर है।  राज्य का क्षेत्रफल अधिक और यहाँ जनसंख्या का घनत्व बहुत कम है। 

राज्य का 60 प्रतिशत क्षेत्रफल मरुस्थल है जहाँ पर राज्य की 30 प्रतिशत आबादी रहती है। इस लिहाज से ग्रामीण और दूरस्थ ग्रामीण जनता को इस योजना का अधिक लाभ मिले इसके लिए मजबूत क्रियान्वयन एवं निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता होगी। 

पहले-पहल जनता और प्रशासन इस तरह की योजनाओं को लेकर बहुत उत्साहित रहते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनका उत्साह ठंडा पड़ जाता है और फिर योजनाओं का दुरुपयोग होना प्रारंभ हो जाता है। कुछ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले डा. रमन सिंह की सरकार में ऐसी एक योजना का भारी मात्रा में दुरुपयोग होता हुआ अनुभव किया गया है। निजी अस्पतालों का एक वर्ग है जिसे इस तरह की योजनाओं का दुरुपयोग करने में जरा भी संकोच नहीं होता।  स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को खराब करने में भ्रष्टाचार की भूमिका रहती है। राजस्थान सरकार इस तरह की जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार होने से कैसे रोकेगी यह विचारणीय प्रश्न है। ऐसी योजनाओं का दुरुपयोग होने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही और सजा का प्रावधान रहना चाहिए। इस योजना को लेकर जनता का फिडबैक लगातार सरकार तक पहुँचे इसका भी उपाय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को करना होगा।

राजस्थान की यह योजना जनकल्याण के लिए एक मिसाल साबित हो, यही आमजनों की कामना होगी।


(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए। ) 




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