दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । मन की हजार शक्तियाँ
मन के विस्तार का नाम ही मनुष्य है। पृथ्वी पर जो कुछ भी मानवीय हो रहा है वह मनुष्य के मन की गतिविधियाँ का ही फैलाव है। मन प्रकृति की ही शक्ति है। मन आकाश का प्रतिनिधित्व करता है। हमारा मन का फैलाव उतना ही बड़ा है, जितना की आकाश। तीव्रता मन की महान शक्ति है। मन प्रकाश की गति से भी तेज दौड़ता है। मन सभी आयामों में बिना किसी माध्यम के प्रवेश कर सकता है।
मन आजाद पंक्षी है। मनुष्य का शरीर जहाँ नहीं जा सकता वहां मन बड़ी आसानी से पहुँच जाता है। हम अपने मन के सहारे किसी भी स्थान पर एक क्षण में पहुँच सकते हैं। गति, विस्तार, तरलता, आकारहीनता, रंगरहित, गंधरहित यह सब मन के स्वभाव के लक्षण एवं विशेषताएँ हैं।
मन को धारण करने वाले जीव का नाम ही मनुष्य है। चित्त, अंतःकरण आदि मन के ही सर्वनाम हैं। मानसिक अवस्था, अंतःकरण की स्थिति, चित्त की दशा जैसी होगी, मनुष्य वैसा-वैसा स्वभाव बनाएगा।
हमारा मन हमें परिभाषित करता है। हम कौन हैं और आगे भविष्य में क्या होंगे, इसका निर्धारण मन की दशा ही तय करते हैं। मन एक विशाल कोरा कागज है, इसमें जो कुछ भी आप लिखेंगे, चित्रण करेंगे, रंग भरेंगे वही-वही वहाँ प्रदर्शित होगा। मन एक विशाल आकाश है, जहाँ जो भी आवाज होगी, पुनः प्रतिध्वनित होकर सुनाई देगी।
मन एक बड़ा दर्पण है। इस दर्पण के सामने जो भी खड़ा करेंगे वही उसमें दिखाई पड़ेगा। मन एक सुंदर पुष्प है। इसमें जैसी सुगंध होगी, वैसी सुगंध सभी दिशाओं में बिखरेगी। मन एक स्पर्श शक्ति है। जिसको स्पर्श करेंगे, उसी का अनुभव होगा। मन में छू लेने की शक्ति है। मन एक विशाल गुल्लक है। उसमें जो कुछ रोज डाला जाएगा, वही वहाँ जमा होगा। मन भावनाओं का अथाह सागर है। इसी सागर रूपी मन में ही विचारों की अनंत लहरें उठती हैं। विचार की एक लहर आती है, तो दूसरी लहर लौट जाती है।
मन एक अत्यंत उर्वर खेत है। इस खेत में जो कुछ बोया जाएगा, उसी की फसलें लहलहाएंगी। मन एक जंगल है। इस जंगल में हजारों की संख्य़ा में वनस्पतियाँ हैं। कोई विचार बरगद के पेड़ के समान फैलने वाले स्वभाव के हैं। कोई विचार लताओं के समान लिपटने वाली हैं। कुछ विचार जहरीले पौधों के समान विषैले और जीवन के लिए हानिकारक हैं। इस सघन जंगल में मीठे फल देने वाले विचार भी हैं, जो हमारे स्वास्थ्य को अच्छा बनाते हैं।
मन रूपी जंगल में रोज घास भी उग आते हैं, जिनका कोई महत्व तो होता नहीं लेकिन लोग हरी घास समझ कर खा लेते हैं और अपनी भूख मिटाते हैं। मन की हजार शक्तियां हैं। मन बहुरूपिया है। वह तरह तरह के रूप धारण करता है। मन ही मनुष्य का मित्र है और इससे बड़ा दुश्मन भी कोई नहीं। मन एक धारदार चाकू है, इससे फल काटा जा सकता है और किसी को आहत किया जा सकता है।
मन अपना काम कैसे करता है, इस रोचक बात को जानना एवं समझना हमारे लिए आवश्यक है ? मन पर नियंत्रण कौन रखता है ? मन पर नियंत्रण रखती है हमारी बुद्धि। बुद्धि पर नियंत्रण कौन रखता है? बुद्धि पर नियंत्रण रखता है हमारा अहंकार। अहंकार पर कौन शासन करता है? अहंकार पर शासन करता है हमारा विवेक। मोटे तौर पर, बुद्धि, अहंकार, विवेक आदि मन की ही अवस्थाएँ हैं। जिसमें उनकी जितनी मात्राएँ होंगी, उसी के अनुसार व्यक्ति का स्वभाव, धारणा और व्यवहार होगा।
मन का स्वभाव चंचल है, तरल है। इसे जिस पात्र में रखा जाएगा, उसी के आकार का बन जाता है। लोगों के अक्सर शिकायत भरे शब्द होते हैं कि उनका अमुक काम में मन नहीं लगता। मन की इतनी खूबियाँ होने के बाद भी वह किसी उपयोगी काम में क्यों नहीं लगता? यह सचमुच में रोचक बात है। जैसा पहले ही बताया गया है मन पर बुद्धि का शासन चलता है। यदि हमें मन से जरूरी एवं उपयोगी कार्य करवाना है जो उसे बताना होगा कि उसे क्या काम करने हैं? उद्देश्य के बिना वह इधर-उधर भटकता रहेगा। मन लगता नहीं। उसे लगाना पड़ता है।
(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)
(प्रकाशन की शर्तः यह लेख अखबारों एवं पत्र-पत्रिकाओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक है। यह लेख सबके पढ़ने के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)
चित्र का स्त्रोतः https://exploringyourmind.com/power-mind-health/



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