दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । अभ्यास ही संभव कराता है
अभ्यास का विशेष महत्व है। जानने-सीखने के लिए जो सबसे अधिक जरूरी तत्व है वह है - अभ्यास । हमारे जीवन की गतिविधियां ही अभ्यास है। हमने चलना, बोलना, दौड़ना, चढ़ना, पढ़ना, लिखना हर बात हमने अभ्यास करके ही सीखा है। अभ्यास अर्थात् दुहराव।
एक ही कार्य को बार-बार करना अभ्यास है। जो दौड़ने का अभ्यास करते हैं, वे कुशल धावक बन जाते हैं। रोज लिखने का अभ्यास करने वाले लेखक बन जाते हैं। गाने का सतत अभ्यास करने वाले गायक बन जाते हैं। ज्ञान का अभ्यास करने वाले ज्ञानी बन जाते हैं। धन को जमा करने से अमीरत्व का भाव आता है।
एक ही बात को बार-बार करते रहने से उसमें विशेषज्ञता आ ही जाती है। अभ्यास यानी कर्म का संग्रह। जो अधिक अभ्यास करेंगे वे अधिक कुशल होंगे। कुशलता का संबंध अभ्यास की अधिकता से है। अधिक अभ्यास मतलब अधिक कुशलता। जो भी किसी विषय के विशेषज्ञ होंगे उनमें उनके अनेक वर्षों के श्रम पूर्वक अभ्यास का योगदान होता है।
यदि कोई विफल है तो उसके पीछे अभ्यास की कमी अवश्य रहती है। जो भी मिलेगा अभ्यास के द्वारा मिलेगा। हाथ बढ़ाने से ही हाथ में कुछ अवश्य आएंगे। वास्तव में, संसार की हर चीज अभ्यास से आगे बढ़ी है। मनुष्य की प्रगति में अभ्यास का ही योगदान है। इसमें दो मत नहीं कि ऊँची बातों के लिए अधिक अभ्यास करना ही पड़ता है।
विद्या और कला अभ्यास द्वारा ही सीखी जाती है। संगीत की विधाओं को अभ्यास के बिना सीखना असंभव है। अभ्यास ही हर चीज को संभव कराता हैं। अभ्यास सिद्ध गुरु है। महानता की पहली सीढ़ी अभ्यास है। सफलता का पहला सबक अभ्यास ही है। जो भी व्यक्ति अभ्यास करेगा वह सबसे अलग नजर आएगा। किसी विषय में सिद्धि पाने में अभ्यास का परम योगदान रहता है।
अभ्यास के अभाव में आसान बातें भी मुश्किल लगती है। अभ्यास के बल पर असंभव समझे जाने वाली या कठिन नजर आने वाली बातों को भी संभव किया जा सकता है। जिसने भी सफलता पाई है, उसके पीछे उस विषय पर गहन अभ्यास का योगदान रहता है। अभ्यास के अभाव में सफलता और उत्कृष्टता मिलना मुश्किल रहता है। रचनात्मक कार्यो को बार-बार दोहराने से मन में विशेष असर पड़ता है और उसका प्रभाव हमारे कार्य, विचार और व्यवहार में होने लगता है।
मान लीजिए आपके पास एक प्रेरणादायी किताब है, लेकिन उसमें क्या बातें लिखी हैं, किन बातों और विषयों की महत्ता उजागर की गई है, इसकी जानकारी तभी होगी जब उसका अध्ययन बार-बार किया जाएगा। अधिक बार पढ़ने के बाद ही हमें उसमें लिखी बातों के अर्थ समझ में आते हैं। अभ्यास स्वयं ही करना होता है। हम अपने जीवन में कुछ विशेष चाहते हैं, कुछ विशेष बनना चाहते हैं तो हमें अपने विषयों और कला का गहन अभ्यास करना ही होगा। खेल में अभ्यास का ही महत्व है। केवल चलने का अभ्यास ही कितना कठिन होता है, इसको देखना हो तो छोटे बच्चे को देखिए जो अभी-अभी चलने का प्रयास कर रहा है। वह बार-बार गिरता है, फिर भी चलने का प्रयास करता है। एक दिन दौड़ने लगता है। इससे प्रमाणित होता है कि अभ्यास ही सभी चीजों को सीखने की प्रामाणिक विधि है।
हम वही बनेंगे जिस विषय का ज्यादा अभ्यास करेंगे। एक बालक विद्या अभ्यास नहीं कर पाने से निराश होकर घर लौटते हुए जब कुएँ के पास पानी पीने के लिए जाता है तो वहाँ महिलाएँ घड़ा भर रही थीं। वह कहता है कि मिट्टी के घड़ों को खड़ा करने के लिए कितने अच्छे गड्ढे बनाए हैं। महिलाएँ उसे समझाते हुए कहती हैं कि ये गड्ढे उन्होंने नहीं बनाएँ हैं, बल्कि कई वर्षों तक मिट्टी के घड़ों को बार-बार यहाँ रखने के कारण गड्ढे बन गए हैं।
इस बात से उस बालक को बड़ी प्रेरणा मिली। वह समझने लगता है कि मिट्टी के घड़ों को भी बार-बार एक ही जगह पर रखने से पत्थर में गड्ढे हो जाते हैं। वह अब खूब पढ़ाई का अभ्यास करता है, बार-बार अभ्यास करता है और अपने विषय का महान विशेषज्ञ बन जाता है। जीवन को उन्नत बनाने के लिए गड़बड़ी को हटाने का अभ्यास और अच्छाई लाने का अभ्यास करना होगा। गलतियों की पुनरावृत्ति हमें पतन की ओर ले जाती है। अच्छाई का अभ्यास उन्नति करता है। सघन अभ्यास करके कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है। सही-सही अभ्यास आवश्यक है। सही अभ्यास के लिए गुणीजनों का सानिध्य आवश्यक रहता है।
(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)
(प्रकाशन की शर्तः यह लेख अखबारों एवं पत्र-पत्रिकाओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक है। इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)



Comments