दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । रुचि में महान सृजन शक्ति होती है

हर व्यक्ति का जन्म से ही कुछ न कुछ विशिष्ट स्वभाव रहता है। उसका किसी कार्य में विशेष रुचि रहती है। किसी कार्य को करने में वह ज्यादा से ज्यादा समय लगाता है। आगे जाकर हमारी यही रुचि हमारे स्वभाव को नियंत्रित करती है। आम तौर पर रुचि उसे कहा जाता जिसको बार-बार करना मन को पसंद आता है। हालाँकि रुचि और पसंद अलग-अगल अभिप्राय रखते हैं। 

राग या लगाव मनुष्य के मन का मूलभूत गुण है। मन का गुण है किसी में जुड़ जाना या चिपक जाना या अपने में चिपका लेना। इसी चिपकाव या लगाव को रुचि कहते हैं। इसलिए हर मनुष्य को किसी न किसी बात पर रुचि रहती ही है। रुचि मन की एक सकारात्मक क्रिया है। रुचि में महान सृजन शक्ति होती है। जो लोग इसको जाने-अनजाने में समझ लेते हैं, वे जीवन में उल्लेखनीय प्रगति करते हैं। मन उसी बात की रुचि करता है जिसे कर पाना उसके लिए सरल रहता है। जबकि बिरले मनुष्यों में ही किसी ऊँचे कार्य के प्रति रुचि रहती है। जिसके पास भी किसी काम के लिए गहरी रुचि है उसे वह कार्य सहज एवं सरल लगता है। रुचिकर कार्य को करने की शक्ति देने वाला पदार्थ है उमंग। 

मानसिक क्रियाओं में सबसे महत्त्व का स्थान भावना या उमंग का ही है। यही वह संचालिनी शक्ति है जो बुद्धि को उत्तेजित करती है और इच्छाशक्ति को कार्य की ओर प्रेरित करती है। जीवन के हर ढाँचे का मूलाधार निपुणता, सिद्धि, विजय प्राप्त करने की तीव्र इच्छा ही है। वह कौन-सा भाव है जो जीवन के उद्देश्य की जान है। वह चित्तवृत्ति प्रेम या रुचि है। प्रगतिशील पुरुषों एवं नारियों को इसी रुचि की ही आन्तरिक प्रेरणा आगे बढ़ने को उकसाती रहती है। साधारण अर्थों में किसी काम में रुचि होने का मतलब है उसमें प्रेम होना। विद्वानों ने रुचि को दो भागों में बाँटा है – जन्मजात रुचियाँ और सीखी हुईं रुचियाँ। 

रुचि या शौक के लाभ हैः  

1. मन की समस्त शक्तियों को एक ओर लगाना

2. स्तवःसंचित शक्ति को बढ़ाना

3. स्मरण-शक्ति को सहायता पहुँचाना

4. मन की उर्वरा-शक्ति की वृद्धि करना

5. व्यवसाय या इच्छा-शक्ति को दृढ़ करना।

किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उद्योग करने से मन को एकाग्र करने की आदत पड़ती है। उद्देश्यहीन रहने से ही ज्यादातर लोगों के ध्यान के भटकने की आदत हो जाती है। ऐसे मन भटकने का इलाज भी यही है कि जीवन को किसी निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति में लगा दिया जाय। रुचि और उद्देश्य मन को कार्य करने की एकता प्रदान करते हैं, उनके द्वारा मन की समस्त रचनात्मक शक्तियों का संग्रहण हो जाता है। बिना उद्देश्य के मन का कोई केंद्र नहीं होता और वह इधर-उधर भटकता रहता है। जैसे ही कोई उद्देश्य मिल जाता है मनुष्य की स्मरण शक्ति, कल्पना, न्याय, बुद्धि, व्यवसाय – उसके मन की कुल क्रियाएँ एक साथ मिलकर उस लक्ष्य की दिशा में उद्योग करने लगती हैं। यह भी ध्यान रखने योग्य है कि बहुत-से उद्देश्य रखने से शक्ति छिन्न-भिन्न होकर नष्ट हो जाती है। जितनी अधिक रुचि होगी, मन एकाग्र रहेगा। गहन रुचि रखने से ही नए विचारों की उत्पत्ति होती है। संगीत में गहरी रुचि से ही मधुर संगीत का जन्म होता है। जिसकी जिस विषय में रुचि होती है उसमें उसका ध्यान रहता है। जिस वस्तु पर हम ध्यान देने लगते हैं, उसमें हमारी रुचि उत्पन्न होने लगती है।

कई तरह के सैद्धांतिक दृष्टिकोणों के बावजूद, एक व्यापक सहमति है कि ज्ञान का संचय गंभीर रूप से रुचि विकास से जुड़ा हुआ है। वास्तव में, रुचि को अक्सर साहित्य में ज्ञानीय भावना के रूप में स्वीकार किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति की रुचियों में उनकी आयु, परिस्थितियों, अनुभवों एवं आवश्यकताओं के आधार पर परिवर्तन होते रहता है। 

पढ़ना एक सार्वभौमिक रुचि है। संगीत भी एक सार्वभौमिक रुचि है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचि की पहचान करके उसे सकारात्मक दिशा में ले जाना चाहिए। अपनी रुचि का अधिकतम उपयोग करके हम उसे अपनी भलाई के लिए नियोजित कर सकते हैं। किसी बात को जानने, सीखने और आगे बढ़ने के लिए रुचि तत्व की आवश्यकता रहती है। 

वही कीजिए जिसमें आपकी गहन रुचि है। अपनी रुचि का काम पकड़िए। किसी विशेष विषय पर अपनी गहरी रुचि जगाइए, विकसित कीजिए और उसका अनुसरण कीजिए। आपकी रुचि का पीछा कीजिए। अपनी रुचि के कार्य को अधिकतम सीमा तक कीजिए। दिन-रात अपनी रुचि वाले कार्य को करने में ही लगे रहिए। अपनी रुचि में निष्ठा रखिए, भरोसा रखिए। अपनी सकारात्मक रुचि को जीवन साथी बनाइए। आपकी रुचि आपको एक दिन आपकी मंजिल तक पहुँचा देगी। 

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(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)

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