दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । कथनी और करनी दो शक्तियाँ - इन्हें जोड़ कर रखिए

यह आलेख मन, वचन और कर्म में परस्पर संबंध की महत्ता का रहस्योद्घाटन करता है। 

यदि मनुष्य के शरीर से मन का लोप हो जाय तो उसकी हैसियत किसी भी अन्य जीव-जंतुओं की तरह हो जाएगी। यानी मन के अभाव में मनुष्य जीवन निर्वाह के लिए सामान्य गतिविधियाँ ही कर पाएगा। शरीर में मन की उपस्थिति से ही मनुष्य की महिमा है। सभी बात का उत्पादन मन में ही होता है, फिर उसे शब्दों के द्वारा व्यक्त या अभिव्यक्त किया जाता है और अंततः उसी का अनुसरण करके कार्य संपन्न होते हैं। अर्थात् तीन बातें महत्वपूर्ण हैं – मन, वचन और कर्म। सभी बातें इन तीनों के द्वारा ही निर्देशित रहती हैं।

मन तीन महान शक्तियों से युक्त है। यह शक्तियाँ हैं – जानना, मानना और करना। जैसी हमारी जानकारी होगी, वैसी हमारी मान्यताएँ होगी और उसी के अनुसार हमारे कार्यकलाप होंगे। जानना, मानना और करना या मन, वचन और कर्म प्रत्येक बात और पदार्थ में इन्हीं की प्रधानता रहती है। सैद्धाँतिक रूप से एक मनुष्य जैसा अपने मन में विचार करता है, उसे वैसी बात बोलनी चाहिए और उन्हीं बोलों के अनुसार ही उसे अपने कार्य संपादित करने चाहिए। यह कितनी सरल और सीधी बात लगती है, और यह है भी सरल, सीधी और सच्ची। 

विडम्बना देखिए, दुनिया की 700 अरब आबादी में 7 करोड़ लोग खोजना मुश्किल हो जाय, जिनके मन, वचन और कर्म में एकरूपता मिल जाय। आज दुनिया में समस्या इसी बात की है कि लोग अपने मन में अच्छे विचार नहीं ला पाते, किसी विधि द्वारा अच्छे विचार ले भी आते हैं तो उसी के अनुसार अभिव्यक्त (वचन) नहीं करते और यदि किन्हीं उपायों द्वारा अभिव्यक्त कर भी लेते हैं तो उसके अनुसार आचरण नहीं कर पाते। एक सामान्य आदमी के मन, वचन और कर्म में स्वाभाविक रूप से विरोधाभास रहता है। अपने वादे से मुकर जाय ऐसे सज्जन से भला कौन अपना संबंध रखना चाहेगा।

मनुष्य को मन इसलिए मिला है ताकि वह अपना उत्थान और कल्याण कर सके। लेकिन हम इस महान बात के लिए सदैव उदासीन रहते हैं। जैसे चलते-चलते मशीन में खराबी स्वतः ही आ जाती है, उसी तरह हमारे मन में अनियंत्रित चाल- चलन के कारण उसमें कई तरह की खामियाँ आ जाती हैं। इन कमियों का हमें पता नहीं लगता और हम उसी दोषपूर्ण मन से बार-बार काम लेकर खराब आचरण करने में लगे रहते हैं। हम अपने मन की ओर देख नहीं पाते। मन के हालत को समझ नहीं पाते। मन का उत्थान करने का उद्यम नहीं कर पाते। 

आमतौर पर हमारा ध्यान हमारे बोलने और करने पर ही रहता है। लेकिन जो हमारे जीवन का केंद्र बिंदु है  - हमारा मन, उस ओर कभी ठीक ढंग से ध्यान नहीं दे पाते। वचन और कर्म में खामियाँ वचन और कर्म के कारण नहीं है बल्कि यह खामी मन में जमा दोषों के कारण है। लोगों पर हम अक्सर ही झूठा होने का आरोप लगाते हैं, दगाबाज होने का आरोप मढ़ते हैं। या उनके प्रति निरादर का भाव रखते हैं जो अपनी कही गई बातों को नहीं निभाते। हम अक्सर ही राजनेताओं की वादाखिलाफी के प्रति नाराजगी जताते हैं। लोग अपने वादे निभाने में आनाकानी न करें इसलिए करारनामे, समझौता-पत्र आदि लिखवाए जाते हैं तथा अवहेलना करने पर दंड का प्रावधान भी रखा जाता है।

हम सबको यह बात भली-भाँति ज्ञात है कि जैसे हम कहते हैं, वैसा हमें करना चाहिए, लेकिन हम ऐसा करने में अक्सर ही चूक जाते हैं। हम अपनी चूक पर न तो खेद जताते हैं और न ही अपनी भूल को सुधारने का प्रयत्न करते हैं। हम शुभ योजनाएँ तो बहुत बनाते रहते हैं, लेकिन उन योजनाओं पर अमल करने की बारी आती है तो हमारा सब-कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। 

कहने का आशय यह है कि मन, वाणी और कार्य में एकरूपता का ही महत्व है। ये तीनों पदार्थ आपस में गुथे हुए होने चाहिए, तभी इसकी उपयोगिता और महत्ता रहती है। समाज में जो अपने वादे नहीं निभाते, या अपनी कही गई बातों के अनुसार चाल-चलन नहीं करते, ऐसे लोगों को विश्वसनीय नहीं माना जाता। बातों का अर्थ तभी है जब हम उसे संपन्न करेंगे। आइए, यह संकल्प दोहराएँ - मेरा मन मेरी वाणी में स्थित हो जाय, मेरी वाणी मेरे कर्म में स्थित हो जाय। मन में एक भव्य विचार रखिए, उसका बार-बार चिंतन कीजिए और उसके होने तक सतत प्रयास करते रहिए। आप उतना ही कहिए जितना करने का सामर्थ्य आप में है। जो आप से नहीं हो पाएगा, उसका भरोसा मत दिलाइए। अपनी क्षमता को आक लीजिए फिर उसके अनुसार अपना व्यवहार कीजिए। झूठी शान के चक्कर में न पड़िए और शेखचिल्ली न बनिए। वादा कीजिए और उसे निभाइए, यही बढ़िया नीति है। आपकी कथनी ही आपकी करनी बन जाय, इसका अभ्यास कीजिए। कथनी और करनी में महान शक्तियाँ निहित हैं, इन दोनों को जोड़ कर रखिए। अपनी मधुर कल्पनाओं को सच साबित कीजिए। वही कहिए, जो किया जा सके। वही कीजिए जैसा कि कहा गया है। 

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(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)

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Photo: https://artprojectsforkids.org/how-to-draw-flowers/

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