दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । कुछ न कुछ अच्छा करते रहिए
जिस तरह चिटियाँ कुछ न कुछ करते रहती हैं, स्थिर नहीं रहतीं, उसी तरह ही कुछ न कुछ कार्य करते रहिए। बड़ा काम न हो सके तो उससे छोटा काम कीजिए। छोटा काम न बन पाए तो उससे भी छोटा काम करना प्रारंभ कीजिए। वह भी न हो सके तो उससे भी छोटा काम हाथ में लीजिए। कुछ न कुछ अच्छा करते रहिए, लेकिन शांत मत बैठे रहिए। आप अपनी पसंद का कोई काम चुन लीजिए। पसंदीदा काम मतलब है रचनात्मक कार्य। जिन कामों को करने से प्रसिद्धि मिलती है, मान बढ़ता है, उसी काम को ही करिए। किताब पढ़िए, कविता लिखिए, राग सुनिए, कैलीग्राफी सीखिए, वाद्ययंत्र बजाइए, महान लोगों की जीवनी पढ़िए, लाइब्रेरी जाइए, पीड़ितों की सेवा कीजिए. कलाकारों से मिलिए, हस्तलेखन कीजिए, गिली मिट्टी से खेलिए । आज से ही कोई छोटी शुरुआत कीजिए। अपनी एक राह चुनिए और उसी पर ही चलना स्वीकार कीजिए।
रचनात्मक कार्यों को करने से मनोबल बढ़ता है। साथ ही यह भी ध्यान रखिए कि जिन कामों को करने के लिए विधि द्वारा निषेध किया गया है, उन कार्यों को करने के बारे में मत सोचिए, क्योंकि विधि विरुद्ध कार्य करने से भय उठता है। भय युक्त मन से जीवन की गतिविधियाँ उलझ जाती हैं।
सकारात्मक कार्यों को सतत रूप से करते रहने से मन में मानसिक द्वंदों की उत्पत्ति नहीं होती। हमेशा सकारात्मक रहना है, उसका प्रण कर लीजिए। संकल्प कीजिए कि कोई भी परिस्थिति आए, आप समझदारी से ही काम लेंगे। अनैतिक काम करने के लिए कोई कितना भी बड़ा लालच दे उसे अस्वीकार कर दीजिए।
केवल और केवल नीति सम्मत कार्यों को करने का ही विचार कीजिए। अपने स्वभाव के प्रतिकूल कोई काम मत कीजिए। जिन कामों को छुपा कर करना पड़े, उन कामों को करने से परहेज कीजिए। दुनिया में अच्छाई और अच्छे लोगों की बहुत जरूरत है। समाज में हमेशा अच्छे लोगों की मांग बनी रहती है। समाज को चलाने के लिए जो अच्छाई चाहिए, उन अच्छाई की पूर्ति कीजिए।
बहुत सारे युवा कम आयु में ही बुरी संगति के कारण उन नीति एवं नियम विरुद्ध कार्यों में संलिप्त हो जाते हैं, जिससे आगे चलकर तन, मन और धन की हानि का गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है। आप स्थानीय समाचार पत्रों में रोजाना ही ऐसे समाचारों की अधिकता पाएँगे।
दो विरोधी भावों में संघर्ष की स्थिति को द्वंद कहते हैं। द्वंदों में भय एक महत्वूर्ण विकार है। भय एवं अनिश्चितता, चिंता और आशंका मानसिक उलझनें बनाती हैं। इसके कारण मन में तनाव की स्थित पैदा हो जाती है। तनाव युक्त मन उपयोगी नहीं रहता। भय युक्त मन से कुछ भी करने से उसका फल उत्पन्न नहीं होता। इसीलिए उन्नति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के लिए मानसिक द्वंदों से बचे रहना आवश्यक है।
मन में उचित विचार रखना, भविष्य में अनिष्टों से मुक्त रहना, वाणी से मधुर बोलना, सबका भला चाहना, मन को उदार रखना – ये वे विचार-पद्धितियाँ हैं, जिनसे मनुष्य सभी प्रकार की परिस्थितियों में शान्त और न्यायोचित बना रहता है। उचित विचार क्या है, जिन विचारों से किसी का अनिष्ट नहीं होता, जो सबके प्रति सद्भावना, प्रेम, उदारता से युक्त हैं, जिनमें मनुष्यों की भलाई के लिए लगन, प्रेम, उत्साह, और सेवा-भावना है, जो सदा नवीन रचनात्मक भावनाओं से परिपूर्ण हैं, वे ही सही विचार हैं।
नित नए समाजोपयोगी कार्य करने, कला, संगीत, साहित्य से जुड़े कार्य करने, आशावादी भावनाएँ बनाए रखने और रचनात्मक चिंतन करने से मनुष्य द्वंदों में फंसने से बच सकता है। जो व्यक्ति रोज नए-नए ऊँचे ख्याल अपने मन में बनाएगा और थोड़ा बहुत भी उसके अनुरूप कार्य करेगा, तो भी उसके मन में द्वंद नहीं ठहर सकता। जहाँ उजाला है, वहाँ अंधकार कैसा। सतत रूप से अपने कार्य में लगे रहने से आलस्य से बचाव मिलता है।
जिस दिन हम किसी भी विधि द्वारा आलस्य से बच जाएँगे, उसी दिन से ही हमारे अंतस में आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा। ऐसे व्यक्ति एक कार्य के पश्चात दूसरे कार्य में सफलताएँ प्राप्त करते चलता है। सही विचार, उचित दृष्टिकोण, मौलिक कार्य और सतत कार्य करते रहने से द्वंद, विवाद आदि दूर होते हैं। हमारे पास सदैव ही दो शक्तियाँ रहती हैं – ज्ञान और कर्म। ज्ञान और कर्म बराबर मात्रा में अपना कार्य करते हैं, तो मानसिक अवस्था सकारात्मक बनी रहती है। ज्ञान तथा कर्म जब साथ-साथ बढ़ते हैं तब जीवन आगे बढ़ता है। थोड़ा-थोड़ा बढि़ए लेकिन निरंतर बढ़ते रहिए।
***
(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)
सुधि पाठकों से निवेदन है कि रचना अच्छी लगने पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया अवश्य लिखिए।
ब्लॉग उपयोगी लगने पर सब्सक्राइब करना न भूलें। कोई रचना आपके मन को छुए तो रचना के लिंक को सोशल मीडिया पर जरूर साझा कर दीजिएगा, ताकि अधिक लोग उसे पढ़ सकें।




Comments