दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । अभाव, प्रभाव और स्वभाव के भेद



समाज में रहने के कारण हमारा जीवन सामाजिक है। मेल मिलाप हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मेल मिलाप करके ही हमारा जीवन संचालित होता है। मेल मिलाप के समय जो हम आचरण करते हैं उसे व्यवहार करते हैं। व्यवहार करना सामाजिक शिष्टाचार है। लोगों के आचरण को देखकर ही व्यवहार करना चाहिए। साथ ही लोगों के साथ व्यवहार करते समय ही उनके आचरण के बारे में पता चलता है। 

लोगों के व्यवहार में कुछ विशिष्ट बातें छिपी रहती हैं। वह विशिष्ट बातें ही उन्हें व्यवहार करने के लिए मजबूत करती है। व्यवहार अच्छे या बुरे दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं। व्यवहार एक तरह की प्रतिक्रिया है। जो लोग भी उचित ढंग से सकारात्मक प्रतिक्रिया दे पाते हैं उनकी अलग प्रतिष्ठा रहती है। हमें उत्तरदायित्वपूर्ण प्रतिक्रिया देनी चाहिए। यानी हमारा रवैया जिम्मेदारी पूर्ण होना चाहिए। हमारा व्यवहार जितना अधिक जिम्मेदारी पूर्ण होगा हमारा सामाजिक जीवन उतना अधिक सफल माना जाएगा।

यह सदैव स्मरणीय तथ्य है कि मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति समाज से ही होती है। समाज मानवीय व्यवहारों का उलझा हुआ विशाल संजाल है। व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं और स्वार्थों की प्रतिपूर्ति के लिए उसे अन्यों के पास जाना ही पड़ता है। यह एक तरह की सामाजिक मजबूरी है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के पास जाता है तो उसके तीन कारण तत्त्व अथवा विशिष्ट उद्देश्य होते हैं– अभाव, प्रभाव और स्वभाव। ये तीन बातें हमारे व्यवहार को दिशा देती हैं।

व्यक्ति को जब भी आवश्यकता पड़ती है तो वह उसकी पूर्ति के उद्देश्य को लेकर दूसरे के पास जाता है। उसे लगता है कि वह चीज अमुक व्यक्ति के पास मिल सकती है। अभाव की पूर्ति के लिए दूसरों के प्रति आशा रखनी पड़ती है। व्यवहार करते समय यह समझ रखना आवश्यक है कि लोग अपने दुःखों के लिए सहानुभूति भी चाहते हैं।

कोई व्यक्ति जब किसी विशिष्ट योग्यता या गुणों का स्वामी होता है तो अन्य लोग उनके पास जाते ही हैं। मनुष्यों का आपस का संबंध है। सब अलग-अलग दिखते भर हैं लेकिन अंदर से सबका सबके प्रति आत्मीयता और लगाव रहता है। अतः अच्छा स्वभाव सबको आकर्षित करता है।

जब भी कोई व्यक्ति हमारे पास आता है तो हमें सद्भावनापूर्ण व्यवहार करना चाहिए और यह भावना भी रखनी चाहिए कि उसका किसी भी रूप में हित हो जाय। यदि हम धनी हैं, तो लोग हमारे से या हमारे माध्यम से धन पाने की लालसा रखकर हमसे मिलने आएँगे।

यदि हम किसी ऊँचा पद पर आसीन हैं अथवा हममें कोई विशिष्ट योग्यता है तो लोग उससे प्रभावित होकर हमसे निकटता पाने के लिए आएँगे। जिनके पास जो चीज नहीं होती, वही चीज उसे आकर्षित करती है। यानी अभाव से आकर्षण पैदा होता है। हमें ऊँचे चीजों की अनुभूति करनी होती है, इसलिए भी हम दूसरों के पास जाते हैं। किसी के पास जाने का अर्थ है किसी चीज की चाह रखना।

इसी प्रकार ही, जब हमारा स्वभाव अच्छा होता, मिलनसार होता है, तो लोग हमारे पास आएँगे। वे इसलिए आएँगे क्योंकि हमारे में उनके साथ अच्छा व्यवहार करने की क्षमता है। जब किसी आदमी के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं तो उसका मान बढ़ता है। हमारे अच्छे व्यवहार के कारण मनुष्य की गरिमा बढ़ती है।  

लोगों से मेल मिलाप और व्यवहार करते समय उनकी भावनाओं को चोट न पहुँचे और उनका मान न घटे, इसका विशेष स्मरण रखना चाहिए। हमसे जो कोई मिलता है, वह हमसे कुछ न कुछ चाहता अवश्य है। या हम जिनसे मिलने जाते हैं तो यही ध्येय हमारा भी रहता है कि हमें कुछ मिल जाय। इसलिए हमारे पास देने के लिए कुछ न कुछ अवश्य ही रहना चाहिए। कम से कम हमें अच्छा व्यवहार तो अवश्य करना चाहिए।

जब कोई हमसे मिले तो हम उसे किसी रूप में समृद्ध बनाकर ही वापस भेजें और जब हम किसी से मिलकर लौटें तो किसी न किसी रूप में समृद्ध बनकर ही लौटें। जाने-अनजाने में हमारे द्वारा क्या दिया जा रहा है और हमारे द्वारा क्या किया जा रहा है, इसके प्रति सजगता आवश्यकता है। इन बातों का ख्याल रखने से जीवन में संकट आना रुकता है।



(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए। ) 

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