दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । बुराई की संगति हानि कारक होती है
लोगों का संग किए बिना काम नहीं चलता। संग करके ही समाज को जाना-समझा जाता है। समाज में तरह-तरह की विचारधारा और मान्यताओं के लोग रहते हैं। हमारी मुलाकात जिस भी व्यक्ति से होती है, उससे हम कुछ न कुछ मात्रा में प्रभावित होते हैं।
कुछ लोगों के कार्य सचमुच में समाज विरोधी होते हैं। निःसंदेह ही कुछ लोग आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं। चोरी, शराब सेवन, व्यभिचार, जुआ, हिंसा आदि कार्यों को विधि के द्वारा प्रतिबंधित किया गया है। क्योंकि इनसे सभी प्रकार से हानि होती है। जिन लोगों में इन कार्यों को करने की प्रवृत्ति पाई जाती है, उनसे दूरी बनाए रखने में ही भलाई है। किशोर बालक-बालिकाओं को ऐसी वृत्ति वाले लोगों से दूर ही रखना चाहिए।
बुराई संक्रामक होती है। यह तेजी से फैलती है। एक बार मन में बुराई के बीज लग जाय तो यह बाद में परेशानी खड़ा करेगा। बुराई के कारण मनुष्य अनावश्यक ही में मुसीबतों से मोल ले लेता है। बुराई की संगति हानि कारक होती ही है। एक बुराई कई बुराईयों को पैदा कर देती है। बुराई तथा बुरी संगति में रहने से अपयश तो होता ही है, साथ ही आर्थिक क्षति होती है तथा मानसिक दुर्बलता आती है। शर्त लगाना, जुआ खेलना और सट्टा खेलना आदि कुसंग के ही परिणाम होते हैं। कुसंग से बचना आवश्यक है।
बुरे आचरण वाले लोगों के साथ उठना-बैठना; बुरे लोगों की संगति आदि कुसंग कहलाता है। कुसंगति का शाब्दिक अर्थ है- बुरी संगति। हम जिनके भी सम्पर्क में आते हैं, उसका प्रभाव हमारे ऊपर थोड़े या बहुत मात्रा में अवश्य ही पड़ता है। चूल्हे के पास आने पर आग की गर्मी का अनुभव मिलता है। आइसक्रीम खाने से मुंह में ठंडक आ जाती है। बारिश होने पर धरती भीग ही जाती है। घने पेड़ की छाया शीतलता देती है।
हम जो कुछ सामाजिक व्यवहार सीखते हैं उसका स्त्रोत व्यक्ति और समाज ही होते हैं। हम जिनके सम्पर्क में आते हैं, उनके गुण-दोष हमारे ऊपर चिपक जाते हैं। इसी का नाम संगति का असर पड़ना है। अच्छे लोगों की संगति से हमारे में अच्छाई आएगी। बुराई से ओत-प्रोत लोगों के मिलने पर उनकी बुराई हमारे में भी आ जाएगी। यह कभी नहीं हो सकता कि परिस्थितियों का प्रभाव हम पर न पड़े।
दुष्ट और दुराचारी व्यक्ति के साथ रहने से सज्जन व्यक्ति का चित्त भी दूषित हो जाता है। यह प्रामाणिक बात है कि जो जैसे व्यक्तियों के साथ उठता-बैठता है, वह किसी दिन वैसा ही बन जाएगा। बुरे लोगों के साथ उठने-बैठने से अच्छाई का नाश हो जाता है और बुराई घर कर जाती है। यदि हमें किसी व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार का पता लगाना हो तो पहले हमें उनके साथियों का व्यवहार जानना चाहिए। उनके आचरण और व्यवहार से ही उस व्यक्ति के चरित्र का सही ज्ञान हो जाता है।
मनुष्य में जितना दुराचार, चरित्रहीनता और नशापान आदि होते हैं, वे सभी कुसंगति के फलस्वरूप ही आते हैं। समाज में अनेक भले लोगों को भी बुरी संगत में पड़कर विपत्तियों से ग्रसित होता हुआ देखा गया है। बुरा व्यक्ति तो बुराई छोड़ नहीं सकता, बल्कि अच्छा व्यक्ति ज़रूर बुराई ग्रहण कर लेता है। हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं तो हमें उथले स्वभाव वाले लोगों की संगति करने से बचना होगा।
विद्व पुरुषों की संगति से ही हममें गुण आएगा। अच्छी संगति से बुराइयाँ दूर होती हैं तथा अच्छाई का विकास होता है। अच्छी संगति दो प्रकार से होगी - गुणवानों के सम्पर्क में रहकर उनसे शिक्षा ग्रहण करना तथा श्रेष्ठ पुस्तकों का अध्ययन करना।
जैसे आग के पास आने पर वह वस्तुओं को जलाती है, तपाती है, वैसी ही कुसंग से व्यक्ति भीतर ही भीतर जलता है और परिणाम में उसके भीतर का मानसिक बल तपकर शुष्क हो जाता है। बाद में जीवन में घोर निराशा व्याप्त हो जाती है। जैसे प्यासे को पानी पीने से तृप्ति मिलती है, ऐसे ही अच्छे आचरण वाले लोगों के संग करने से जीवन में प्रसन्नता एवं संतोष रहता है और परिणाम में जीवन के प्रति आशा जगती है।
(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)
सुधि पाठकों से निवेदन है कि रचना अच्छी लगने पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया अवश्य लिखिए।




Comments