दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । संकल्पवान पर गुणों का जल्दी असर होता है
मनुष्य के मन में ग्रहण करने की शक्ति होती है। इसलिए वह ग्रहणशील प्राणी है। उपयोगी बातों को जल्द ही समझ लेता है, जान लेता और सीख लेता है। मानने, जानने और कर्म करने की शक्ति होने के कारण मन सूक्ष्म रूप से प्रत्येक चीज को ग्रहण करते रहता है। मनुष्य के मन में रोजाना हजार बातें प्रवेश करती रहती हैं। जबकि गुणों को मन के भीतर प्रतिस्थापित करने के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं। कोई माने या न माने, मनुष्य के भीतर उपस्थित गुण ही उसे मनुष्य का दर्जा दिलाते हैं। दया, क्षमा, करुणा, प्रेम, सद्भाव, अहिंसा आदि भाव मानवीय गुण हैं।
वैसे तो आज के समय में सबसे बड़ा गुण है ज्ञान। मन के शोधन के लिए ज्ञान सबसे उपयुक्त है। बोध क्षमता होने के कारण ही मनुष्य में गुणों को ग्रहण करने की उर्वरता आती है। गुणों को ग्रहण करना मानवीय उत्तरदायित्व है। सद्गुणों के रहने से ही मनुष्य के भीतर मानवता पनपती है। सेवा भाव एक अच्छा मानवीय गुण है। यह प्रमाणिक बात है कि प्यार और दया की भावना हमें आंतरिक खुशी और शांति बनाए रखने में मदद करती है।
सद्गुणों से ही मनुष्य पहचाने जाते हैं। सद्गुणों से ही मनुष्य महापुरुषों की उपाधि को प्राप्त कर लेता है और अवगुणों से असुर। सद्गुणों से यश और सम्मान पाता है और दुर्गुणों से अपयश और सजा। हमें सदैव गुण-ग्राहक बनके रहना चाहिए। गुण-ग्राहक मनुष्य को सभी जगह पसंद किया जाता है। कहावत है कि हँस पक्षी दूध और पानी भेदकर केवल दूध को ही ग्रहण करता है।
इसी तरह हम भी अपने जीवन में अच्छी और सच्ची बातों को ही ग्रहण करने की कोशिश करें। गुण-ग्राहकता जीवन में आगे बढ़ने और कुछ अच्छा करने, कुछ बेहतर बनने के लिए अनिवार्य है। हमें जहाँ से भी अच्छी बातें सीखने को मिले, उसे सीखना चाहिए। न सिर्फ सीखना चाहिए बल्कि अच्छी बातों को जीवन में उतारना भी चाहिए और उसी के अनुसार व्यवहार भी करना चाहिए।
हमारे सामने हर रोज अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ आती हैं। हमारा सम्पर्क भी विभिन्न विचारधाराओं, मान्यताओं और भावनाओं वाले लोगों से मेल-मुलाकात होती है। यदि हम उन परिस्थितियों में भी गुण-ग्राहकता का दृष्टिकोण अपना लें और हरेक में विद्यमान अच्छाई को ही देखने का अभ्यास करें तो एक-एक व्यक्ति से, एक-एक गुण लेते हुए हम भी सर्वगुण सम्पन्न बन सकते हैं।
जैसे शिक्षा, ऊँची बातें, आदर, प्रेम, सादगी, माधुर्य, सहजता, सरलता, विनम्रता आदि गुण ग्रहण करने योग्य होते हैं। गुण-ग्राहक होने के लिए अपने मन को खुला रखना चाहिए। ज्ञान, गुण या विशिष्टता या तो सीधे सफल, गुणी व्यक्ति से हासिल किया जा सकता है या फिर विचारों के अध्ययन के द्वारा।
गुण-ग्राहक बनने के लिए विचारों, भावनाओं और विविध दृष्टिकोणों का आदर करना चाहिए। हमारे द्वारा ग्रहण किए गुण हमें एक अच्छे इंसान के रूप में रूपान्तरित कर देते हैं। मन में गुणों को ग्रहण करने की अनंत शक्ति है। महान लोगों के उच्च आचरण का अवलोकन करने से गुण ग्राहकता बढ़ती है। जिनके भीतर जैसे गुण होंगे वह वैसी घटनाओं को आकर्षित करेगा।
गुण ग्रहण करने की पात्रता सब में है। पात्रता का विकास करने के लिए मानवीय गुणों पर भरपूर भरोसा रखना होता है। संकल्पवान होने से गुणों का जल्दी असर होता है। धारण किए गए गुण कभी भी बेकार नहीं जाते। वे किसी न किसी दिन काम आएँगे ही। कितनी ही विपरीत परिस्थितियाँ हो हमें मानवीय गुणों का ही पक्ष लेना चाहिए। मानवीय गुणों के साथ रहने पर कभी भी नुकसान नहीं है, वरन लाभ ही लाभ हैं। आपके गुण ही किसी दिन आपकी पहचान बनेंगे। महत्व गुणों का होता है न कि मनुष्य के शरीर का।
महान साहित्यों के पठन- पाठन से मन के गुण-ग्राहकता क्षेत्रफल का विस्तार होता है। बुराइयों का त्याग करने से व्यक्ति में स्वतः ही गुण ग्राहकता की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। गुणों एवं महानतम बातों को अपनाने में जीवन की सार्थकता है।
(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए। )
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आपकी रचना को बल देता है, साधुवाद आप के गुण एवं रचना को