कहानीः रुसेन कुमार। कचरे के ढेर में मिले सितार से जब बज उठा संगीत



एक कहानी सुनाता हूँ। कहानी कुछ इस प्रकार से है। पुराने समय की बात है। किसी नगर के एक सभ्य परिवार में एक सितार रखा हुआ था। पीढ़ियों पहले उस घर में कोई ऐसा संगीत प्रेमी था जिसे उस सितार को अच्छी तरह बजाना आता था। अब तो यह सितार किसी कोने पर टंगा रहता था। बिना किसी उपयोग के उसकी चमक धूमिल हो रही थी।

उस वाद्य यंत्र को कैसे बजाते हैं, परिवार के लोग अब नहीं जानते थे। जो लोग भी जानते थे वे थोड़ा-बहुत जानते थे। बजाने की कला को धीरे-धीरे भूलते जा रहे थे। वह सितार अब शौकिया तौर पर टंगा रहता और दीवार की शोभा बढ़ाता। वह अब केवल प्रदर्शन की वस्तु था। कुल मिलाकर वह एक बेकार की वस्तु थी, उसकी उपयोगिता अब न थी।

कोई बच्चा जिज्ञासावश उस सितार के तारों को छेड़ देता तो घर के अन्य लोग नाराज हो जाते। कभी हवा के झोंके से तार झंकृत होकर बज उठतीं तो नींद टूटने पर नाराज हो जाते। बिल्ली छलाँग मारकर उस वाद्य यंत्र को गिरा देती तो झनझनाती ध्वनि से घर के लोग बुरी तरह परेशान हो जाते। सितार की आवाज़ उनके कानों में चुभन पैदा करती। 

वह सितार एक उपद्रव का यंत्र था। शोर-शराबे का कारण था। परेशानी का पर्याय था। घर में अशांति का कारण था वह। उस घर में सबके लिए जगह थी लेकिन उस वाद्य यंत्र का होना अब अपशकुन था। घर के लोग संगीत के प्रति इतने उदासीन हो चुके थे कि अब कोई उसे बजाने का साहस जुटा नहीं पाते थे।

एक दिन घर के लोगों ने एक विशेष मन्त्रणा की। वहाँ सबने अपनी-अपनी पीड़ा व्यक्त की। सबने अपने-अपने ढंग से यह बताने की कोशिश की कि वह वाद्य यंत्र उनके जीवन में कितनी सारी परेशानियाँ पैदा कर रहा है। किसी ने कहा कि वह जगह घेरता है। किसी ने कहा कि वह बहुत डरावना दिखता है। किसी ने यह भी कहा कि तारों से बच्चों की उंगलियाँ कट जाने का खतरा है। किसी के सिर पर गिर जाय तो अनहोनी हो सकती है। 

एक ने तो यहाँ तक कह दिया कि पुरानी वस्तुओं को घर में रहना ठीक नहीं क्योंकि वे अशुभ होती हैं। सबके पास अपने-अपने वाजिब कारण थे। वे सभी किसी न किसी कारण से उस यंत्र से घृणा करते थे। यह समझ मुश्किल था कि वे संगीत से दूर हो रहे थे या सितार की मधुर ध्वनियाँ उनकी समझ के बाहर की वस्तु थीं।

अतंतः सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि इस वाद्य यंत्र को अब अधिक दिनों तक घर में नहीं जा सकेगा। फिर क्या, उस घर के लोग उस प्राचीन सितार को घर के बाहर कूड़े के ढेर में फेंक आए। घर लौटकर सबने राहत की साँस लीं। सबको लगा कि एक बड़ा भारी बोझ उनके सिर से उतर गया, एक बला टली, विपदा दूर हुई। सबने परम सुकून का अनुभव किया। उनकी परेशानियों का कारण जो उनसे अब दूर हो गया था।

अभी घर लौटे थोड़ी देर ही हुई थी कि उन सब को कुछ मधुर स्वर सुनाई पड़े। बाहर निकलकर देखा तो वे सभी हैरान रह गए। उस सितार को उठाकर कोई व्यक्ति बड़े प्यार से उस पर कोई विशेष राग का वादन कर रहा था। इसके कारण पूरे वातावरण में रंजकता पैदा हो गई थी। वहाँ संगीत के माधुर्य और आकर्षण से मंत्रमुग्ध होकर सब आनंदित हो रहे थे।

जब उस घर के लोगों को सितार के कर्णप्रिय स्वर और संगीत का प्रत्यक्ष असर मालूम पड़ा तो जैसी ही उस सज्जन ने बजाना बंद किया तभी उन सभी ने उस सज्जन से कहा – यह सितार हमें लौटा दो। यह सितार हमारा है। उस सज्जन ने कहा – सितार उसी का है जो उसे ठीक से बजाना जानता है। इस तरह वे आपस में लड़ने-झगड़ने लगे। उन्होंने कहा – हमें हमारा सितार वापस चाहिए। 

उस कुशल वादक ने समझाते हुए कहा –  तुम्हारे घर में यह बेकार पड़ी रहेगी। जगह घेरेगी। कोई बच्चा सीखना के लिए तारों को झंकृत करे तो कान में चुभन पैदा होगी। बजाना न आये तो शाँति भंग हो जाती है।

आखिर में बहुत आग्रह करने पर उस सज्जन ने उस लोगों को सितार वापस कर दिए। उस कलाकार ने कहा - केवल सितार होने से काम नहीं बनने वाला, बल्कि उसे बजाने के नियम भी सीखने होंगे। सब कुछ बजाने वाले पर निर्भर करता है। लौटाने की यह प्रमुख शर्त है आप लोग इसे बजाना सीखें। 

अब तो उस घर में सितार गूँजते ही रहता। कोई न कोई उसे बजाना सीख रहा होता। वे सभी बारी-बारी से बजाना सीखते। वह कलाकार अब उनके घर नित्य आया करता और सभी उनसे आगे-आगे बढ़कर संगीत सीखते। किसी समय सितार के स्वर सुनते ही उस घर की शाँति भंग हो जाया करती थी, अब उस सितार के स्वर सुनते ही सबके मन में असीम शाँति उतर आती। अब तो जिस दिन सितार की मधुर ध्वनियाँ सुनाई न पड़तीं, उस दिन सभी लोग व्याकुल हो उठते। संगीत उनके जीवन में घुलने लगा था। वे जीवन के सांगीतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे थे। 

कहानी की प्रेरणा यही है कि  जीवन को उचित ढंग से जीने में उससे संगीत निकल सकेगा। हमें जीना नहीं आता, इसलिए वस्तुएँ और हमारे आसपास के लोग बेकार प्रतीत होते हैं। जाने-अनजाने में हम लोग भी अपने मूल्यवान जीवन को किसी दिन फेंक आएंगे। जीवन एक सितार है, उसमें कई तार हैं, उसे नियमबद्ध बजाने पर ही कोई मधुर ध्वनि निलकेगी। 

(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए। ) 



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