दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । आशा ही जीवन की संजीवनी शक्ति



आने वाले समय में हमारे साथ कुछ भी होगा वह अच्छा ही होगा, ऐसी विचारपूर्ण भावना का नाम आशा है। हमने यह अक्सर ही लोगों को कहते सुना होगा कि जो होता है अच्छे लिए होता है और भविष्य में जो होगा वह भी अच्छे के लिए होगा। आशा एक प्रकार की मानसिक शक्ति है। जीवन की घटनाओं और परिस्थितियों में सकारात्मक परिणामों का विश्वास रखने का नाम आशा है। 

आशा का विपरीत शब्द है - निराशा। जीवन में कभी न कभी निराश तो आती ही है। यह सामान्य बात है। आशा मन का बल है। दुर्बलता को आशा द्वारा दूर किया जाता है। आशा में महान शक्ति निहित है। आशा ही जीवन की धुरी है। आशा जीवन के चक्र को घुमाने का काम करती है। 

किसको आशा रखनी पड़ती है। आशा रखनी पड़ती है मन को। मन चौबीसों घंटे विपरीत चिंतन करने का आदी हो चुका है। इसलिए मन अक्सर जीवन के लिए उन्नति का कारण न बनकर अवनति के कारण बनता है। मन की दो खराब वृत्ति है – शंका और आलस्य। इन्हीं के कारण मन में आशा नहीं जग पाती। बुद्धि को हस्तक्षेप करके मन में आशा जगानी पड़ती है। 

आशा न रखने के कारण मनुष्य निराश हो जाता है। चूँकि मन ही सम्पूर्ण इन्द्रियों का स्वामी है, अतः मन में जब कभी निराशा फैलती है तो इसका दुष्प्रभाव सभी इन्द्रियों पर पड़ने लगता है। जैसा मन का आदेश होगा, इंद्रियाँ वैसे-वैसे कर्म करेंगी। यदि मन में जीवन के लिए प्रतिकूल भावना जागती है तो इसका प्रभाव हमारे तथा हमारे अपनों के जीवन में पड़ना स्वाभाविक है।

हमें हर हाल में जीवन के लिए अनुकूल भाव का चिंतन करना है अर्थात् आशान्वित रहना है। जीवन में आगे बढ़ने में इसी भाव का सहारा लेना चाहिए। कई बार श्रम करने के बाद भी आशातीत परिणाम नहीं आते, तो क्या हुआ। वास्तव में आशा जीवन की प्रेरणा होती है। आशा रखने का गुण मनुष्य में जन्मजात होता है। यह जीने का आधार है। किसी भी कारणों से आशा न डिगे इसका ख्याल रखना चाहिए।। मनुष्य प्रकृति की उपज है। मनुष्य के लिए प्रकृति में सब कुछ सहज उपलब्ध है। बस एक अच्छा दृष्टिकोण चाहिए देखने के लिए। जीवन से बढ़कर और कोई उपलब्धि नहीं। 

प्रत्येक विषय के दो पक्ष हैं - आशा-निराशा, दिन-रात, धरती-आकाश, काला-सफेद, सत्य-असत्य, लाभ-हानि, हार-जीत आदि। आप आकाश के बारे में विचार करेंगे तो इसका उसका कोई अंत नहीं है। हिंसा का चिंतन करेंगे तो वह विध्वंसक हो जाएगा। असत्य का चिंतन करने पर हजारों चीजें असत्य नजर आएँगे।

दोषों पर नजर डालेंगे तो चारों ओर त्रुटियाँ ही नजर आएँगी। यह आवश्यक है कि जीवन में हमें हर परिस्थिति में आशा ही रखनी है, सकारात्मक रहना चाहिए। आशा रखने से बड़ी-बड़ी समस्याओं का निवारण मिल जाता है। कुछ भी हो जाए आशान्वित ही रहना चाहिए। आशा ही जीवन की संजीवनी शक्ति है। आशा की भावना रखने से प्रत्येक चीज उपयोगी और सहयोगी लगने लगेगी।

आपका मन कभी उदास रहे तो छोटे से जीव चींटी के जीवन संघर्ष की कल्पना कीजिए। वह दिन-रात अपने काम में लगी रहती है, उसमें निराशा ही नहीं है। आप भी परिश्रम करते रहिए। निराशा कभी न आए इसके लिए कुछ न कुछ प्रयत्न करते रहिए। कुछ न बन सके तो कोई प्रेरणादायी किताब ही पढ़िये।

आशा ही विजय, सफलता, सुख व आनंद दिलाती है। आशा रखकर ही जीवन में ऊँची सफलता प्राप्त की जा सकती है। महापुरुष, वैज्ञानिक हुए हैं वे सब आशा व उत्साह से भरे हुए होते थे। आशावादी उत्साही बनिए, देखिएगा आप एक नई राह खोज ही लेंगे।

हमें सावधानी रखते हुए सदैव ऐसे लोगों का साथ रहना चाहिए जो जीवन के प्रति आशावादी नजरिया रखते हैं। इस कटु तथ्य को स्वीकारना ही चाहिए कि बहुत सारे लोग सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक कारणों से जीवन के प्रति आशावादी नजरिया नहीं रखते। वास्तव में देखा जाय तो मनुष्य विचारवान और ज्ञानवान प्राणी है। 

अनुकूल दिशा में चिंतन करने पर आशा रहती है जबकि प्रतिकूल भाव का चिंतन करने पर निराशा निर्मित होती है। जीवन में कितनी भी प्रतिकूल परिस्थिति आए आशावादी नजरिया ही रखना चाहिए। प्रकृति ने हमें आनंदित रहने, निराश नहीं रहने तथा दीर्घकाल तक जीने के लिए यह जीवन प्रदान किया है। आशा ही प्राण वायु है। किसी भी हालत में हमें आशा नहीं खोना ही। जीवन के प्रति हमारी आशा हमारे परिजनों में नई आशा का संचार करती है। 

 


(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए। ) 

 


 

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