दैनिक प्रेरणाः रुसेन कुमार । तिरस्कार और आलोचना के प्रति उदासीन रहिए
एक समय की बात है मुम्बाकुलु नगर में दो चतुर कुत्ते रहते थे। उन्होंने किसी रोज अखबार में पढ़ा कि 100 किलोमीटर दूर चिन्नीकुलु नगर में रोजाना मुफ्त में स्वादिष्ट भोजन मिलता है। उन्होंने इस शहर में जाकर शेष जीवन बिताना निश्चित किया और वे शीघ्र ही वहाँ पहुँचना चाहते थे। उन्होंने निश्चय किया कि वे रोजाना 10 किलोमीटर का सफर करेंगे और इस तरह 10 दिनों में आराम से सफर पूरा हो जाएगा। जिस नगर या गाँव में शाम होगी वहाँ ठहरेंगे और वहाँ सैर-सपाटा करेंगे, मनोरंजन करेंगे। आज सफर का पहला दिन था, वे पूरे उत्साह के साथ सफर पर आगे बढ़ते रहे। शाम हुई तो वे एक गाँव में ठहरे। इन दो प्रतिभाशाली कुत्तों को अपने गाँव में आया देखकर गाँव के कुत्तों ने सामूहिक रूप से इन दोनों का कड़ा प्रतिकार किया। ये तिरस्कृत कुत्ते वहाँ से भागे, सोचा कि रात भर सफर करेंगे और 20 किलोमीटर वाले अगले स्टापेज पर रुकेंगे। अगली सुबह किसी नए शहर जा पहुँचे। जिस शहर में पहुँचे तो वहाँ के कुत्तों ने भी उनका जोरदार ढंग से उनके उद्देश्यों की आलोचना की और वहाँ रुकने नहीं दिया। इस तरह वे जिस भी गाँव या शहर में रात्रि विश्राम के लिए रुकते वहाँ के कुत्ते उन्हें ठहरने ही नहीं देते, खदेड़ देते। कुत्तों में आपस में दुश्मनी होती है, वे अपने-अपने गाँवों में अपने को सर्वाध्यक्ष समझते हैं। अत्यधिक आलोचना और तिरस्कार के कारण इन दोनों कुत्तों ने 10 दिनों का सफर 5 दिनों में ही पूरा कर लिया। अब वे शानदार भोजन का लुत्फ उठा रहे हैं।
जीवन सफर में लोग हमारा तिरस्कार करते हैं तो इससे हमें तेजी से अपने लक्ष्य की ओर भागने का अवसर मिल जाता है। जो लोग भी हमारी आलोचना और तिरस्कार करते हैं, वे हम पर बड़ा उपकार करते हैं क्योंकि वे हमें आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर देते हैं। जब भी आप किसी महान पथ पर आगे बढ़ेंगे, लोग आलोचना प्रारंभ कर देंगे। आप कोई भी छोटा या बड़ा सकारात्मक काम करना शुरू कीजिए, आप किसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़िए, आपके साथ कम लोग आएँगे, आपकी अनोखी विचार-धारा से कम ही लोग इत्तेफाक रखेंगे। वे आपको अनेक विधि एवं उपायों के द्वारा आपको मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए विचलित करेंगे। आपके उपक्रम आगे न बढ़े, इसके लिए बाधा डालेंगे। वे समझाएँगे कि यह काम बहुत जोखिम से भरा है। स्मरण रखिए, सोए हुए लोगों के मार्ग पर कोई रोड़ा नहीं आता।
दुनिया में हजार घटनाएँ रोज होती हैं। यदि हम प्रत्येक घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते रहें तो हमारी मानसिक शक्ति छिन्न-भिन्न हो जाएगी। बिखरी हुई शक्ति से कोई उन्नत काम करना संभव ही नहीं है। हमें आगे बढ़ने का बहुत शौक रहता है लेकिन हम अपनी असीम शक्तियों को रोज ही निर्थक कार्यों में लगा कर उसे बिखेर डालते हैं।
हमें हर पल अपने लक्ष्य का ध्यान रहना चाहिए, स्मरण रहना चाहिए। जैसे ही हम अपना लक्ष्य भूलते हैं, विपदा आ घेरती है। जैसे ही हम लोगों से उलझन बढ़ाते हैं, हमारा पतन सुनिश्चित हो जाता है। उलझने के बाद पतित होने से कोई नहीं रोक सकता। जीवन सफर में अक्सर ही हम लोग छोटी-छोटी बातों में उलझने की कोशिश करते हैं।
उदासीनता में बड़ी शक्ति है। तिरस्कार और आलोचना के प्रति उदासीनता अपनाना अच्छी नीति है। जो दुनिया के मामलों में अत्यधिक रुचि लेते हैं वे अपनी राह से शीघ्र ही पथ भ्रष्ट हो जाते हैं। जैसे हम काँटों से बचकर चलते हैं, ऐसे ही हमें आलोचना करने वालों से दूरी बनाकर रहना चाहिए और तीव्र गति से अपने सफर की ओर आगे बढ़ना चाहिए। यदि हमारा लक्ष्य किसी विशेष स्थान पर पहुँचने का है तो हम बात-बात पर पीछे मुड़कर देखेंगे तो हमें अपने गंतव्य तक पहुँचने में वर्षों लग जाएँगे। कोई महान कार्य चुनिए और उसी में आगे बढ़ते रहिए। कहीं पर मत अटकिए। दुनिया के झंझटों से बचकर चलने में ही बड़ी समझदारी है। दुनिया के लोग आपको अपनी झंझटों में फंसाने के लिए उतावले रहते हैं। विचलित करने के लिए लोग आपकी आलोचना करेंगे। आलोचना मिलने से उसमें उलझने की पूरी संभावना रहती है। दुनिया हमें लक्ष्य से भटकाने के लिए बार-बार बाधा डालती है। अपना लक्ष्य ही अपना असली संगी है। सफर के दौरान किसी से न राग, न द्वेष, न प्यार न, न खार - यही आगे बढ़ने का महान सूत्र है। चुपचाप अपने रास्ते पर चलिए। ऐसा करने पर मंजिल जल्दी मिलती है।
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(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब माध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)
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Photo: https://www.lifealth.com/mind-body-and-soul/mental-health/handling-criticism-how-to-deal-with-ciritisim-in-a-positive-way-sd/83643/




Comments
Such a simple solution to all the hatred, criticism and disdain.
Treat the critics as catalyser, wow, it is the best way to punish them:)
Regards,
Arun Arora
Your each story is so meaningful, I just love
To read and try to implement