दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार। उदारता की ओर चलिए




जीवन की उपयोगिता का महत्व है। कोई भला इंसान है इसका अनुमान उसके उपयोगी कार्यों से लगता है। सहयोग लेकर एवं सहयोग देकर ही मनुष्य का जीवन चलता है। असंख्य महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने सेवा और ज्ञान दिए। किसी का जीवन दूसरे के लिए कितनी मात्रा में उपयोगी है उसी का नाम महानता है। 


थोड़ी-अधिक मात्रा में हर किसी में महानता रहती है, क्योंकि घर, परिवार एवं समाज में वह कुछ न कुछ उपयोगी कार्य तो अवश्य ही करता है। महानता को मापने के लिए कलपुर्जे का आविष्कार तो नहीं हुआ है, लेकिन किसी की महानता का अनुमान उसकी आत्मा की उन्नति और उदारता के आधार से किया जाता है। सज्जनता, उदारता, सहृदयता, सभ्यता, शिक्षा, समर्पण, निष्ठा, नैतिकता, आचार-विचार, काम आने की भावना आदि महत्ता तथा उच्चता के मानदण्ड होते हैं।
 
कुछ लोग सचमुच में महान होते हैं। उनके कार्य और विचार दुनिया के किसी भी हिस्से में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उनके कार्यों की प्रभाव सीमा अत्यंत व्यापक होती है। उनके विचार करोड़ों लोगों के हृदय में परिवर्तन ला देते हैं। उनके बारे में पढ़कर, उनके विचारों को सुनकर, जानकर बल की अनुभूति होती है, हौसला मिलता है, प्रेरणा मिलती है, उत्साह मिलता है। महापुरुषों और विदुषियों के विचार और कार्य सकारात्मक होते हैं तथा उनमें भलाई की भावना होती है। अपने हित की तुलना में दूसरों की हित को महत्व देते हैं। किसी व्यक्ति में महानता अचानक से उत्पन्न नहीं हो जाती। विपरीत परिस्थिति आने पर ही किसी व्यक्ति के भीतर में छिपी महानता और उदारता प्रकट होती है। 
 
मनुष्य इस दृष्टिकोण से सामाजिक जीव है, क्योंकि उसके प्रत्येक कार्य और व्यवहार दूसरों से सहयोग और सेवा प्राप्त करके ही चलते हैं। उदार आचरण का जनमानस पर शीघ्र असर होता है। महान जनों के आचरण ही सबके लिए आदर्श और अनुकरणीय होते हैं। श्रेष्ठ पुरुष और नारी जैसे-जैसे आचरण करते हैं, दूसरे लोग भी वैसे-वैसे ही आचरण करने लगते हैं। वे अपने आचरण से जो कुछ प्रमाण कर देते हैं – जैसा आदर्श उपस्थित करते हैं, सारा जनसमुदाय उसी का अनुकरण करने लगता है।
 
अपने को श्रेष्ठ मानने वाले नेतृत्वकर्ता पुरुष और नारियों पर कितना बड़ा दायित्व है कि उसे अपने दायित्व का निर्वाह करने के लिए कितनी अच्छी योग्यता प्राप्त करनी चाहिए, एवं किस प्रकार से स्वयं आचरण करके लोगों के सामने ऊँचे आदर्श उपस्थित करना चाहिए। एक बात यह भी है कि व्यक्तियों के समूह को लेकर ही समाज बनता है। यदि एक व्यक्ति यथार्थ रूप में उन्नत हो गया तो समाज का एक अंग सुधर गया। इसी तरह ही सभी व्यक्ति अपना-अपना उन्नतिकरण कर लेंगे तो सारा समाज अपने-आप सुधर जाय। यदि इसके विपरीत सभी लोग दूसरों का सुधार करने में लग जायँ और अपने सुधार की ओर ध्यान ही न दें तो किसी का भी सुधार नहीं हो पाएगा।

हमारा भी यही प्रयास होना चाहिए कि हमारा जीवन भी किसी न किसी रूप में उपयोगी बन जाय। महानता की ओर चलने के लिए छोटी-छोटी बातें महत्व की हैं। सेवा करने की प्रेरणा, शक्ति और साधन सबके पास कुछ न कुछ मात्रा में पूर्व से ही उपलब्ध रहते हैं। स्वयं अपनी ही वस्तुओं से, आप ही प्रेरणा करके, अपनी ही शक्ति से हर संभव सेवा और मदद महानता की ओर कदम बढ़ाने के सरल उपाय हैं। चाहे कितनी बड़ी बात हो जाय, दूसरों को हानि पहुँचाने का विचार ही त्याग दीजिए। संकुचित स्वार्थ की तुलना में उदार व्यवहार ज्यादा उपयोगी और स्थायी है। 

आप सुशिक्षित हैं, सब बातों को समझने की क्षमता आप में है, अपने निकटस्थ व्यक्ति के हित, सुख और समृद्धि के लिए अपने सामर्थ्य का विस्तार कीजिए, अपने हृदय को विशाल बनाइए।

(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं  लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)

(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)

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