संस्मरणः रुसेन कुमार। प्रो.एन.एन. शर्मा : समर्थ सामाजिक क्षेत्र विशेषज्ञ एवं कर्मयोगी




प्रो. एन.एन. शर्मा के साथ रुसेन कुमार दिल्ली की एक सभा में।

कुछ विरले लोग ही होते हैं, जिनका समाज में कुछ भी स्वार्थ नहीं होता, अपने लिए वे कुछ भी नहीं चाहते। कर्तव्य निष्ठा उनकी विशेषता होती है। सबके लिए, सबके प्रति उनकी भावनाएँ समान होती हैं। वे समझाते हैं और उनकी समझाइश का असर बहुत गहरे तक होता है। 

कुछ ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे – प्रोफेसर नागेन्द्र नाथ शर्मा। 10 अप्रैल 2021 को ब्रह्म में विलीन हो गए। उम्र संबंधी अस्वस्थता में मृत्यु देवता से संघर्ष में हार गए लेकिन अपने शिष्यों, मित्रों और अनुयायियों हेतु हमेशा के लिए मानवीय मूल्य, लगन, सहयोग, सद्भाव, प्रेम, समर्पण, सदाचार सीखा कर अनंतकाल के लिए अमर हो गए। उन्हें आदरपूर्वक प्रो. एन.एन शर्मा संबोधित किया जाता था।

बिरला समूह द्वारा संचालित लब्ध प्रतिष्ठित प्रबंध संस्थान बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) में सस्टेनेबिलिटी एवं कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के डेढ़ दशक से प्रोफेसर थे। उन्होंने तीन दशकों तक सामाजिक क्षेत्र के उन्नतिकरण के लिए अथक कार्य किए। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं - डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी), यूके और वर्ल्ड बैंक के सहयोग के सरकारी, यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (यूएनआईडीओ), यूनाइटेड नेशन्स डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) आदि के सामाजिक विकास परियोजनाओं के साथ कार्य किए।

सस्टेनेबिलिटी एवं कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), सामाजिक उद्यमशीलता जैसे नवीन विषयों में गहरी महारत, वाणी में मधुरता व सरल व्यवहार के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली हुई थी। सोशल सेक्टर विशेषज्ञ प्रो. एन.एन. शर्मा ने कंपनियों को समाज से जोड़ने के लिए मूल्यवान योगदान दिया।

भारत में सामाजिक विकास और कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के क्षेत्र के जाने माने अग्रणी विशेषज्ञ और विद्वान के रूप में उनकी विशिष्ट पहचान थी। सामाजिक, राजनीतिक एवं कारपोरेट जगत तीनों ही क्षेत्रों में उनके विचारों को न केवल महत्व दिया जाता था और उनके सुझावों तथा अनुमोदन पर अमल किया जाता था।

समकालीन सामाजिक विकास और कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) क्षेत्र के विरले ही लोग होंगे जो उन्हें जानते-पहचाने न थे। सामाजिक विकास, सीएसआर, उद्यमशीलता विकास, शिक्षा, मानव संसाधन जैसे विषयों पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं में वक्ता के रूप में पहुँचने पर सभा की शोभा और गुणवत्ता बढ़ जाया करती थी।

उनका व्यक्तित्व अहंकार और किसी तरह की लालसा से रहित था। इन्हीं अंतर्निहित मूल्यों के कारण ही लोग उनसे मिलकर अपनत्व का अनुभव करते थे। एक शिक्षक में जो कुछ भी महानतम गुण होने चाहिए, वे सभी गुण उनके भीतर असीम मात्रा में थे। बाह्य आडम्बर की कोई भी बात उन पर लागू ही नहीं थी। अत्यंत साधारण वस्त्र ही उन्हें प्रिय थे। कार्यालयीन बैठक हो या चर्चा परिचर्चा के अवसर अपनी बातों को स्पष्ट ढंग से रखते थे। 

सामाजिक उद्यमशीलता (सोशल इंटरप्रेन्योरशिप) उनका अत्यंत प्रिय विषय था। उनकी मंशा थी कि प्रबंधन के विद्यार्थी सामाजिक उद्यमशीलता एवं उत्तरदायित्वपूर्ण कारोबार की अवधारणा को आत्मसात करें। 2019 में उनके आमंत्रण पर ग्रामीण बैंक के संस्थापक, प्रसिद्ध बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस का बिमटेक आगमन हुआ था। वे प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस संवाद करते थे और उनके बुलावे पर अंतरराष्ट्रीय बैठकों में शामिल होते थे।  

बिमटेक में यूनुस बिजनेस सेंटर की स्थापित है। इस पहल के अंतर्गत बिमटेक के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट में सामाजिक उद्यमशीलता या सोशल बिजनेस अध्ययन का विशिष्ट विषय वस्तु है। इस अद्वितीय पहल के माध्यम से प्रो.एन.एन. शर्मा देश में सामाजिक उद्यमियों की एक नई पीढ़ी तैयार करने में लगे हुए थे। उनके शिष्य अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उच्च पदों पर रहकर देश की सेवा करे हैं। अनेक शिष्य सामाजिक उद्यमी बनकर समाज को नई दिशा दे रहे हैं।

इसी तरह ही भारतीय कारपोरेट समाज को एक और उनका विशिष्ट योगदान है – सोशल आडिट। सोशल आडिट का सामाजिक विकास में अत्यंत महत्व है। सोशल आडिट को अत्यधिक व्यावहारिक बनाकर इस गूढ़ अवधारणा को कंपनियों के निदेशक मंडल तक पहुँचाने का महान कार्य उन्होंने किया। उनके शिष्य और अनुयायी कारपोरेट पेशेवर उनकी सोशल आडिट की संकल्पना को सार्थक ढंग से व्यवहार में अमल में लाने का कार्य कर रहे हैं। 

सार्वजनिक क्षेत्र की एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी नालको के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशक की भूमिका निभाई। निजी क्षेत्र की अग्रणी सीमेंट उत्पादक कंपनी एसीसी सीमेंट के सोशल ऑडिट कमिटी का पांच वर्षों तक नेतृत्व किया। भारत डालमिया फाउंडेशन में एक प्रमुख सलाहकार थे। 

ग्रामीण बालिकाओं में शिक्षा के द्वारा महत्वाकांक्षा जगाने में शिक्षक कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं इसका ज्वलंत उदाहरण है उनके मार्गदर्शन में स्थापित– प्रोजेक्ट चिरैया। उत्तर प्रदेश के नीमका गाँव की बेटियों में जीवन के प्रति नई चेतना जगाने का काम उनके द्वारा किया गया। वंचित समाज में शिक्षा के द्वारा जागृति लाना आज के समय की महति आवश्यकता है।

(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं  लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)

(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)

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