पिछड़ी जाति के लोग शिक्षा पाने जिद्द और संघर्ष पैदा करें – रुसेन कुमार
संदर्भः अम्बेडकर जयंती
बहुजन समाज के चिंतक रुसेन कुमार ने अम्बेडकर जयंती के अवसर पर कहा कि वंचित समाज और पिछड़ी जाति के लोगों में शिक्षा पाने के लिए उनमें जिद्द और संघर्ष की भावना पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों में शिक्षा के प्रति घोर उदासीनता नजर आती है, जबकि उनके पास उन्नति करने के लिए शिक्षा के बढ़कर कोई श्रेष्ठ साधन नहीं हैं। शिक्षा ही मनुष्य को सोचने समझने की शक्ति देती है।
रुसेन कुमार ने कहा कि आदमी अपने विचारों की ही उपज हैं। उत्थान करने वाले विचारों का सृजन ऊँची शिक्षा के बिना नहीं हो सकता। शिक्षा के अभाव में पिछड़े समाज में विचार शून्यता बढ़ने का खतरा तो रहेगा साथ ही बौद्धिकता संकट भी खड़ा हो जाएगा। विचार शून्यता समाज में विघटन लाता है। लोग काम चलाउ शिक्षा पाना चाहते हैं, जबकि बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने सतत रूप से शिक्षित रहने, संगठित रहने और संघर्ष करने का महान सूत्र वाक्य सौंपा है।
रुसेन कुमार ने कहा कि अपने अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष करने की शक्ति अर्जित की हुई शिक्षा और विचारशीलता से ही आती है, न कि उधार से मिली हुई शिक्षा से। स्वयं के द्वारा स्वयं को शिक्षित करना किस तरह किया जाय, यह उपाय, यह सूत्र बच्चों को देना आवश्यक है। लेकिन यह जिद्द और संघर्ष करने की भावना के बिना नहीं होगा।
यदि पिछड़ी जाति के लोग अपनी संतानों को नहीं पढ़ाते हैं और पढ़ाई का उचित प्रबंध नहीं करते हैं तो उनके उत्थान के लिए बाबा साहब द्वारा उनके करोड़ों बेटे-बेटियों के हाथों में सौंपे गए महान लोकतंत्र का मोल नहीं रह जाएगा। यदि हम लोग अपनी संतानों को किसी भी कारणों से अच्छी शिक्षा से वंचित रखते हैं, जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है, तो हम लोगों बाबा साहब के अनुयायी कहलाने के अधिकारी नहीं रहेंगे। ऊँची शिक्षा प्राप्त करना बाबा साहब के मार्ग पर चलने का सबसे सरल उपाय है।
दुनिया जिस तेजी से बदल रही है, उस अनुपात में शिक्षा के लिए हमारे लोग आगे नहीं आ रहे हैं। न जाने किस कारण से पढ़ाई-लिखाई से दूर हो रहे हैं। अच्छे विचारों को अपनाने के प्रति उदासीनता पूरी पीढ़ी को प्रभावित करती है। शिक्षा के इतने उन्नत साधन होने के बाद भी अपने विचारों को उन्नत नहीं बनाना बड़ा भारी अपराध है, क्योंकि लाचार, मजबूर और विचार शून्य लोगों को कोई भी अपना दास बना लेगा।
किसी समय में शिक्षा का इंतजाम नहीं होने से समाज में भारी अज्ञानता व्याप्त थी, जबकि आज संविधान का संरक्षण होने के बाद भी विज्ञान आदि शिक्षा से वंचित रह जाना भयंकर भूल ही होगी। शिक्षा से विचार उत्पन्न होंगे, विचार से ही व्यक्ति ऊँची आकांक्षा पैदा करेगा और उसे पाने के लिए प्रयास करेगा। यह अच्छे से समझने वाली बात है कि ऊँची शिक्षा के बिना अच्छे जीवन की चाह पैदा नहीं होगी।
शिक्षा कमी के कारण उनके विचार पुष्ट नहीं हो पा रहे हैं, जिससे पिछड़ी जातियों मे भारी मात्रा में भ्रम व्याप्त है। यह समय की मांग है कि बच्चों में विज्ञान सम्मत विचार पैदा हों। लोकतंत्र में मान-सम्मान, नौकरी, पद, प्रतिष्ठा आदि ऊँची शैक्षणिक योग्यता के आधार पर ही मिलती है। शिक्षा को अनिवार्य व्यवहार के रूप में अंगीकार करना ही होगा।
रुसेन कुमार ने कहा कि बाबा साहब ने हमें शासक बनने का लक्ष्य दिया है। यह तभी संभव है जब हमारी पीढ़ी के बच्चों में विज्ञानजन्य शिक्षा पाने के लिए जिद्द और संघर्ष करने की भावना पैदा होगी। उच्च शिक्षा जिसमें जीवन को ऊँचा उठाने का उपाय भी हो उसके बिना ऊँची महत्वाकांक्षा पैदा नहीं होगी। ऊँची महत्वाकांक्षा के बिना जीवन में ऊँचे पदों पर पहुँचना संभव ही नहीं है।
राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए जरूरी अदम्य साहस का उत्पादन ऊँची महत्वाकांक्षा से ही होगा। अम्बेडकर जयंती हमारे लिए एक अवसर है कि हम अपने बच्चों को बाबा साहब की जीवनी पढ़कर सुनाएँ या बच्चों को पढ़ने के लिए आग्रह करें और उन्हें इस बात का एहसास कराएँ कि उस महामानव ने उनके लिए क्या-क्या बौद्धिक विरासत छोड़ गए हैं।
(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)
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