दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । सबसे बड़ी शक्ति है विचार शक्ति




वैचारिक उन्नति करनी है तो मस्तिष्क को उज्वल, सत्य, सौंदर्य, सद्-विचार, हर्ष तथा प्रसन्नता के विचारों से प्रकाशमान रखना होगा। मनुष्य विचारों और धारणाओं का गुच्छा है। उसका सामाजिक व्यवहार व आचरण विचारों द्वारा ही संचालित होता है। विचार ही मनुष्य को आगे ले जाता है, समाज को आगे ले जाता है। विचार ही मनुष्य को गतिशील बनाता है। 

विचार ही उसके समाज को गतिशील बनाता है। विचार और विचारधारा ही समाज को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करते हैं। मनुष्यों के विचारों पर नियंत्रण करके ही उन पर शासन किया जाता है। मनुष्य के कार्यों को विचार ही निर्धारित करते हैं। 

मनुष्य पहले अपने मन में विचार उत्पन्न करता है फिर उसे कार्यों के द्वारा भौतिक रूप में निर्माण करता है। सबसे बड़ी शक्ति है विचार शक्ति। विचार को प्रतिदिन प्रासंगिक और सार्थक बनाना पड़ता है, तभी उसमें ताजगी रहती है। पुराने, सड़े-गले विचार मनुष्य को आगे नहीं ले जा सकते।

यह कितनी खराब बात है कि लोग सदियों पुरानी रूढ़िवादी विचारधाराओं से आज से भी चिपके हुए हैं, जबकि उनके समक्ष उन्नत विचारधाराओं की कमी नहीं है। आज हमने जो जाना-समझा है, वह किसी दिन अप्रासंगिक हो जाएगा। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। दुनिया में कोई चीज स्थायी नहीं है। विचारों के पुराने हो जाने पर उसे छोड़ देने में ही बुद्धिमानी है। व्यक्ति हो या समाज उसके विचारों में परिवर्तन लाए बिना उसमें वांक्षित परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

नए से नए विचारों को अपनाने का प्रयत्न होना चाहिए। हमारा सबसे प्रमुख काम क्या है। सबसे आवश्यक काम है अपने विचारों को देखना और नवीनतम विचारों से अपने मन को सुशोभित करना। हृदय में वह विचार न लाएँ जिसका लक्ष्य ऊँची उड़ान का और आगे बढ़ना न हो। हृदय में चाहे कोई भी विचार आये, कोई संकल्प कीजिए, वृत्ति कैसी ही हो, उस विचार का, उस इरादे का, उस वृत्ति का शरीर तथा रोम-रोम पर अवश्य प्रभाव पड़ेगा। जब आप अपना विचार बदलते हैं और आपकी मानसिक दशा में किसी प्रकार का परिवर्तन आता है तो शरीर में इसका प्रभाव दिखने लगता है। 

मानसिक शक्ति क्षीण है और आप उसे बलशाली बनाना चाहते हैं तो उसका तरीका यह है कि हर समय अपने उद्देश्य को सामने रखें, उसी पर विचार करें, उसी को सोचें और उसी के अनुसार व्यवहार करें। सुंदर, सुगठ और सच्ची वस्तुओं पर चिंतन-मनन करने और उसके बारे में सोचने से हमारी मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। यदि आप लोकप्रिय बनना चाहते हैं तो हर ऊँच-नीच में प्रेम, सहानुभूति तथा विनम्रता के साथ व्यवहार करना चाहिए और अपने क्षीण तथा दुर्बल अवयवों को इतना सक्रिय बना देना चाहिए कि वे बलवान बन जाएँ। 

आपके अंतस में जो कुछ होता है, आपके मानसिक तथा शरीरिक अवयव अत्यंत ईमानदारी से उसी के पदचिन्हों पर चलते हैं। आज आप जैसी कल्पना करेंगे, विचार करेंगे, किसी न किसी रोज वैसा ही हो जाएँगे। यदि आप अपने जीवन में किसी प्रकार का परिवर्तन करना चाहें तो वह आप अपने मानसिक प्रयत्नों द्वारा ला सकते हैं। आपके संकल्प, आपके उद्देश्य, आपके साहस का केवल एक उद्देश्य होना चाहिए कि आप कुछ बनावें, कुछ उत्पन्न करें, कुछ प्राप्त करें। कुछ बन दिखाएँ जिसको संसार आदर की दृष्टि से देखता है। 

ऐसा करेंगे तो आपको अपनी बढ़ी हुई योग्यता पर आश्चर्य होगा, आप में कार्य करेंगे तो आपको अपनी बढ़ी हुई योग्यता पर आश्यर्च होगा, आप में कार्य करने की शक्ति बढ़ जाएगी और उस शक्ति पर आप स्वयं विस्मित होंगे। मूढ़ों का सिद्धांत है - सुनो सबकी पर करो अपने मन की। सहृदयी का सिद्धांत है – जो उन्नत व पुष्ट विचारधारा है उसका व्यवहार किया जाय। 

(रुसेन कुमार, उद्यमी, पत्रकार एवं  लेखक हैं। उनके चिंतन दैनिक अखबारों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।)

(प्रकाशन की शर्तः इस लेख को किसी अखबार या वेब माध्यमों द्वारा प्रकाशित करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशन का अनुरोध rusenk@indiacsr.in पर भेजा जा सकता है।)


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