दैनिक चिंतनः रुसेन कुमार । मित्रता का बढ़ता महत्व



हमें दृढ़ रूप से समझना है कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है, उसका जीवन दूसरों के सहयोग, सहयोग की भावना और सहयोगात्मक व्यवस्था पर निर्भर है । यदि सहायता करने वालों में अपनत्व का भाव रहे तो सामाजिक जीवन सहज बन जाता है । इसमें कोई संदेह नहीं कि सहयोग के बिना जीवन निर्वाह कठिन होता है । मित्रों के सहयोग से जीवन निर्वाह आसान हो जाता है । स्वभाव में समानता दो लोगों को पास ले आती है । जैसे कलाकार हृदय वाले का ‘कला स्वभाव’वाले के साथ सम्बन्ध सहज रहता है । स्वभाव में समानता मित्रता की बुनियाद बनती है ।

मित्रता भावना से समाज में आपसी विश्वास पैदा होता है । सामाजिक सद्भावना बढ़ती है और शाँति की स्थापना होती है । मित्रता के भाव के कारण ही समाज में विभिन्न समुदायों के मध्य परस्पर आत्मीयता पुष्पित-पल्लवित होती है । सहयोग प्रणाली को सुदृढ़ करना आज के समाज की महति आवश्यकता है और यह प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य भी है । सहयोग करना और सहयोग लेना दोनों ही सदैव प्रासंगिक बने रहेंगे । 

आप अपने आसपास जैसे अनेक उदाहरण देखते ही होंगे कि जिन व्यक्तियों में आपस में सहयोग और आत्मीयता का भाव होता है, उनमें परस्पर आकर्षण बना रहता है और वे अन्यों की तुलना में अपने जीवनकाल में अधिक प्रगति कर पाते हैं ।

सामाजिक रूप से कोई भी व्यक्ति इस दुनिया में अकेला नहीं है। वह किसी न किसी से भावनात्मक रूप से जुड़ा ही है। एक इंसान कई इंसानों से भावनात्मक रूप से जुड़ा है। ऐसे ही जटिल सम्बन्धों का ताना-बाना ही हमारा समाज है। हम सबका जीवन परस्पर जुड़ा हुआ है, भीतर से भी और बाहर से भी। हम सहयोग लेते हैं और सहयोग करते हैं। हम भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। प्रेम और भावनाओं का परस्पर का विनिमय करते हैं। आपसी सहयोग के बिना कोई भी व्यक्ति, घर, परिवार, रिश्ते-नाते, समाज और राष्ट्र वाँक्षित प्रगति नहीं कर सकता ।

मानव जाति द्वारा जो भी ऊँची से ऊँची प्रगति की गई है, वह सब आपस में सहयोग करने की प्रवृत्ति और परस्पर सौहार्द की भावना रखने से ही सम्भव हो पाई है । सदैव से ही मित्रता समाज में सहयोग प्रणाली को आगे बढ़ाने में अत्यंत ही मददगार साबित होती रही है ।

समाज में समरसता लाने में मित्रता की भावना का अहम योगदान है । जिनसे सहयोग लेते हैं और जिनका सहयोग करते हैं, उन दोनों के मध्य सम्बन्ध अत्यन्त ही मधुर होना ही चाहिए । मित्रता से समाज में आपसी विश्वास पैदा होता है । सामाजिक सद्भावना बढ़ती है और शाँति की स्थापना होती है ।

दो दिलों में एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता होना ही मित्रता है । मैत्री भाव हर काल की बहुमूल्य मानवीय एवं सामाजिक धरोहर है। जिस तरह धन, ज्ञान, विद्या, स्वास्थ्य, कौशल, यश आदि आज के समाज की महति जरूरतें हैं, उसी प्रकार ही मित्रता भी आज के समाज की अनिवार्य जरूरत है ।

अतः मित्रता का अत्यंत ही सामाजिक महत्व है । जीवन के उत्थान में मित्रों की उपयोगिता है । इसीलिए मित्र बनाने में उत्सुक रहना चाहिए और मित्रता को उसके आदर्श रूप तक निभाने के लिए वचनबद्ध भी रहना चाहिए । हम जिनसे भी मिलते हैं उनका कुछ अंश हमारे भीतर आ जाते हैं। कल्पना कीजिए कि जिनके साथ आप घंटों बैठते हैं, अंतरंग बातें करते हैं, विचार-विमर्श करते है, उनके विचारों ने आपके जीवन को कितने अधिक गहरे ढंग से प्रभावित किया होगा ! 

जिस प्रकार, अगर एक पत्ता हवा के साथ मित्रता करके उसके साथ ऊँचें उड़ता है, हवा के बिना वह मिट्टी में मिल जाता है। उसी प्रकार अच्छी किताबों के साथ अपनी मित्रता करके, उनसे निरंतर प्रेरणा लेकर हम भी प्रगति की ऊॅंचाई तक पहुँच सकते हैं। मित्रता आज के समय में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यह संबंध कई मायनों में अन्य जन्मजात संबंधों से इस संदर्भ में अलग है क्योंकि इसे हम खुद बनाते हैं। 

मित्रता की शुरुआत करना बहुत ही आसान है, लेकिन उसे आगे ले जाना और सहेजना उससे भी ज्यादा जरूरी होता है। मित्रता एक अनमोल उपहार है। अपना अधिकांश समय मित्रता को सहेजने में लगाएं, तो जीवन और भी खूबसूरत होगा।

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(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)

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