प्रेरक कथाः रुसेन कुमार । रहस्यमय पेंटिंग
अंजनेयुलु ने इसका भेद समझने के लिए अपने मन में जोर लगाया। उसने चित्रकार को इधर-उधर ढूंढा, ताकि चित्र की विशेषता पूछ सके, पर वह नहीं मिला।
लौटकर अंजनेयुलु ने गुरु सोमायाजुलु से जिज्ञासा भरे प्रश्न के साथ उस अनोखे पेंटिंग के बारे में सारी बातें कह सुनाईं।
उसने कहा, "एक आदमी अपने मुँह को लंबे-घने बालों से ढके हुए है, उसकी बाहों में पंख हैं लेकिन पैर जंजीरों से बंधा हुआ है। यह क्या रहस्य है ?"
गुरु सोमायाजुलु ने शिष्य को अपने समीप बुलाकर उसके सिर पर प्रेमपूर्वक हाथ फेरते हुए रहस्यमय पेंटिंग का रहस्य समझाया, "जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं, लेकिन मनुष्य अपने से आगे देखता नहीं है। वह मुँह छुपाये बैठा है। अपनी आखों को बुराइयों से ढक रखे हैं। वह शिखर पर पहुँचना तो चाहता है लेकिन उसने अपने पैरों को बांध रखे हैं।"
"जो मनुष्य अपने चेहरे को ढक कर बैठे रहते हैं, वे अवसर को गँवा बैठते हैं। सोचने के ढंग में बंधन के कारण अपने विचारों को पंख नहीं दे पाते।" - गुरु ने कहा।
"अपने चेहरे के निराशा के भावों को हटाओ। सामने के परदे उठाओ, दुनिया को नए ढंग से देखो। अपने हौसले और कल्पनाओं के पंख फैलाओ और अपने दकियानुसी विचारों की बेड़ियों को तोड़ डालो।" - गुरु सोमायाजुलु ने अपने प्रिय शिष्य अंजनेयुलु को समझाया।
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(रुसेन कुमार अग्रणी पत्रकार एवं लेखक हैं। उनके समसामयिक लेख, चिंतन, रचनाएँ आदि नियमित रूप से अखबारों में प्रकाशित होते रहती हैं। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबमाध्यमों में प्रकाशन की अनुमति के लिए rusenk@indiacsr.in पर संदेश लिखिए।)
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Photo: http://the-wanderling.com/early_flyers.html




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